लोकसभा चुनाव में इस पार्टी का पलड़ा रहा है भारी, 1990 से अबतक नहीं घटा मत प्रतिशत

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भोपाल। लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की जनता ने बीजेपी उम्मीदवारों को संसद भेजने में अहम भूमिका अदा की है। लेकिन चुनी गई सरकारें जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। लेकिन फिर भी यहां के लोगों ने भाजपा को भारी मतों से जिताया है। 1990 से अब तक के चुनावी नतीजे तो इस बात की गवाही देते हैं। यहां मुकालबा बीजेपी और कांग्रेस के बीचे ही होता है। अन्य कोई दल अपनी जमीन मजबूत करने में कामयाब नहीं हो सका है। हालांकि, बसपा को कुछ सीटों पर जीत मिलती रही है। हिंदी पट्टी के राज्यों में मध्य प्रदेश बड़ा राज्य है। यहां से 29 सांसद संसद पहुंचते हैं। एमपी से छत्तीसगढ़ अलग होने से पहले यहां कुल 40 सीटें थी। 

एमपी ने देश की राजनीति को बड़े नेताओं को दिया है। यहां भाजपा की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वाराज जैसी नेता विदेश मंत्री हैं। सुमित्रा महाजन वर्तमान लोकसभा स्पीकर हैं। यही नहीं कांग्रेस के खाते में भी कई कद्दावर नाम शुमार हैं। माधावराव सिंधिया से लेकर अर्जुन सिंह तक कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार किए जाते हैं। लेकिन प्रदेश की जनता का झुकाव 1990 से लेकर 2014 तक के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पर अधिक रहा है।हालांकि, विधानसभा चुनाव में यह नतीजे उलट हैं। हाल ही में प्रदेश की जनता ने 15 सालों से सत्ता पर काबिज बीजेपी को बाहर का रास्ता दिखाया है। बीजेपी के कार्यकाल में विकास कार्यों के साथ व्यापमं जैसा घोटाला भी हुआ। जिसके दाग पार्टी के दामन से कभी नहीं मिट सकते। कांग्रेस को इस बार उम्मीद है कि वह लोकसभा चुनाव में बीजेपी से अच्छा प्रदर्शन करेगी। इसलिए पार्टी ने 29 में से 22 सीटों का लक्ष्य भी तय कर लिया है। 

1990 से लेकर अब तक के चुनाव पर एक नजर

वर्ष 1991 का चुनाव

कांग्रेस (INC) को 27 सीटें और 45.3% वोट शेयर मिला। करीब 41.9% के मजबूत वोट शेयर के साथ भी, भाजपा को 12 सीटें मिलीं। बसपा 1 सीट और 3.5% वोटों के साथ बच गई।

चुनाव का वर्ष 1996

बीजेपी ने 27 सीटें और 41.3% वोट पाकर ताल ठोंकी, कांग्रेस को 8 सीटें और 31% वोट मिले। बसपा ने 2 सीटें जीतीं और उनका मतदान प्रतिशत 8.2% था। मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस के नाम से कांग्रेस के एक अलग एक गुट को 1 सीट और 1.5% वोट हासिल हुए। निर्दलीय और अन्य ने क्रमशः 9.6% और 8.4% मतों के साथ 1 सीट जीती।

चुनाव का वर्ष 1998

बीजेपी ने 30 सीटों और 45.7% वोटों से जीत हासिल की। INC को 39.4% वोट शेयर के साथ 10 सीटें मिलीं।

चुनाव का वर्ष 1999

1999 के आम चुनावों में भी, भाजपा ने कांग्रेस की तुलना में अधिक सीटें जीतीं, यानी 29 और 46.6% मतदान प्रतिशत। कांग्रेस ने पिछले चुनावों की तुलना में एक सीट अधिक प्राप्त की, यानी कुल 11 सीटें और 43.9% वोट। 1999 के बाद, वर्ष 2000 में, मध्य प्रदेश का विभाजन हुआ और छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश ने कुछ संसदीय सीटें खो दीं, और अब इसमें 29 सीटें हैं।

चुनाव का वर्ष 2004

विभाजन के बाद, यह पहला आम चुनाव था। बीजेपी ने 29 में से 25 सीटें जीतीं और 48.1% वोटिंग प्रतिशत रहा। INC ने 4 सीटें और 34.1% वोट हासिल किए।

चुनाव का वर्ष 2009

बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद, भारतीय जनता पार्टी 16 सीटें और 43.4% वोट शेयर जीतने में सफल रही। INC ने 40.1% मतदान प्रतिशत के साथ 12 सीटें जीतीं। बसपा को 1 सीट और 5.9% वोट मिले।

चुनाव 2014 का साल

पूरे देश में और विशेष रूप से हिंदी हार्टलैंड में मोदी लहर के साथ, भाजपा ने मध्य प्रदेश से 27 सीटें जीतीं और 54.8% की उल्लेखनीय वोट हिस्सेदारी हासिल की। कांग्रेस में 2 सीटें और 35.4% वोट थे।