केन्द्र की कटौती से बिगड़ा MP का बजट, कई योजनाओं पर लग सकता है ब्रेक

भोपाल।

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के हिस्से के 14 हजार 233 करोड़ रुपए कटौती करने के बाद मध्यप्रदेश का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। इसके पीछे कारण यह है कि राज्य को केंद्र से 63 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी, इसलिए राज्य सरकार द्वारा अबतक इस राशि को ध्यान में रखते हुए बजट का खाका तैयार किया जा रहा था, लेकिन बजट के बाद प्रदेश को मिले झटके से सारे समीकरण बदल गए है।इस कटौती के चलते कई योजनाओं पर ब्रेक लगता हुआ नजर आ रहा है। वही सरकार के भविष्य की रणनीतियों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने 14 हजार 233 करोड़ रुपए की केंद्रीय करों में कटौती कर दी है, जिसके चलते मार्च-अप्रैल में आने वाले मध्य प्रदेश के बजट पर असर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। कटौती उस वक्त की गई है जब कर्जमाफी का दूसरा चरण शुरु होने वाला है, वही कई अन्य योजनाओं को शुरु किया जाना है, वही घोषणाओं पर इसका असर होगा। हालांकि राज्य सरकार इस कटौती की भरपाई केंद्र के अंशदान से चलने वाली योजनाओं की राशि में कटौती करके कर सकती है। इतना ही नही प्रदेश के संसाधनों से जो राजस्व आना चाहिए, वह भी लक्ष्य से 16 हजार करोड़ रुपए पीछे है। माना जा रहा है कि 2020-21 का बजट पेश करने से पहले मौजूदा बजट को पुनरीक्षित किया जाएगा। वित्त विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, राजस्व को लेकर अब पूरा दबाव वाणिज्यिक कर, ऊर्जा, परिवहन सहित अन्य विभागों पर आ गया है।

इस तरह पड़ा प्रदेश पर भार
बीते साल की बात करे तो वित्त मंत्री तरुण भनोत ने दो लाख 33 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया था। इसमें दो लाख 14 हजार करोड़ रुपए शुद्ध व्यय बताया गया था। सभी स्रोतों से आय एक लाख 79 हजार 353 करोड़ रुपए आंकी गई थी। इसमें 63 हजार 750 करोड़ रुपए केंद्रीय करों से प्राप्त होने थे।जुलाई 2019 में केंद्र सरकार ने इसमें कटौती कर राशि 61 हजार 73 करोड़ रुपए कर दी। एक फरवरी 2020 को प्रस्तुत बजट में यह राशि और कम कर 49 हजार 517 करोड़ रुपए कर दी गई। इस प्रकार राज्य को केंद्रीय करों में 14 हजार 233 करोड़ रुपए की कटौती हो गई। इसके अलावा केंद्र से मिलने वाले 36 हजार 360 करोड़ रुपए के सहायता अनुदान में भी कमी आई है।जिसके चलते यह दो लाख 33 हजार करोड़ रुपए से घटकर दो लाख 10 हजार करोड़ रुपए के भीतर रह सकता है। वहीं, इसका असर वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान में भी देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि इस बार बजट का आकार दो लाख करोड़ रुपए के आसपास रह सकता है।