प्रेस के लिए आवंटित जमीन पर बनाई बहुमंजिला इमारत, EOW ने की FIR, नगर निगम, बीडीए के अफसर भी सवालों के घेरे में

इस पूरे मामले में नगर निगम के नगर निवेश विभाग और भोपाल विकास प्राधिकरण की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। 

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। भोपाल पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानि EOW ने शासन से सस्ती दरों पर मिली लीज की जमीन को खुर्द बुर्द कर लीज डीड का उल्लंघन कर कमर्शियल यूज करने वाले 7 नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।  इस पूरे हाई प्रोफ़ाइल मामले में नगर निगम और भोपाल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

भोपाल की EOW पुलिस के अधिकारियों ने एक शिकायत की जांच के बाद ज्ञान प्रकाश वाली संचालक, समाचार पत्र, दैनिक सतपुड़ा वाणी (मृत), अशोक गोयल, प्रोप्रराइटर मैसर्स गोयल बिल्डर्स एंड डवलपर्स भोपाल, श्रीमती ओमवती गोयल, प्रोप्रराइटर मैसर्स गोयल बिल्डर्स एंड डवलपर्स भोपाल, राजकुमार वाली, प्रधान संपादक, सतपुड़ा वाणी, भोपाल, दीपक वाली, प्रकाशक, समाचार पत्र सतपुड़ा वाणी भोपाल, नरेश कुमार बाठिया, दस्तावेज लेखक भोपाल, जावेद खान, जिंसी जहांगीराबाद और नगर निवेशक नगर निगम भोपाल, भोपाल विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ IPC की धारा 420, 406 120 B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की है।

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एफआईआर के मुताबिक शिकायतकर्ता विनय जी डेविड ने 24 फरवरी 2015 में एक उपरोक्त लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि इन लोगों ने मप्र शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा भोपाल विकास प्राधिकरण के माध्यम से सतपुड़ा वाणी समाचार पत्र के नाम पर 36,073 वर्ग फिट जमीन भोपाल के पॉश इलाके एमपी नगर जोन 1 प्रेस कॉम्प्लेक्स में लीज पर ली थी।

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लेकिन इन दबंग लोगों ने बिल्डर, नगर निगम और भोपाल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों, कर्मचारियों से मिलीभगत कर उस बेशकीमती जगह पर समाचार पत्र की जगह बहुमंजिला कमर्शियल बिल्डिंग बना ली और फ़्लैट बेच दिए। इन लोगों ने भू माफिया बिल्डर से सांठगांठ कर लीज डीड पर आवंटित भूमि का लैंडयूज गैरकानूनी तरीके से बदलवा कर ना सिर्फ शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि पहुंचाई बल्कि लीज डीड का भी उल्लंघन किया।

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EOW ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इस पूरे मामले में नगर निगम के नगर निवेश विभाग और भोपाल विकास प्राधिकरण की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

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