MP BOARD : नई शिक्षा नीति का आदेश निरस्त होने के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का बड़ा बयान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  आज से शुरू होने वाली 9वीं से 12वीं तक की ऑनलाइन क्लासेस (Online classes) को  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (Madhya Pradesh Board of Secondary Education) ने रद्द कर दिया है। खबर है कि  स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल (School Education Department and MPBSE) के बीच आपसी सामंजस ना होने के कारण यह फैसला लिया गया है, हालांकि ऑनलाइन कक्षाएं कब से संचालित होंगी, इसको लेकर विभाग की तरफ से किसी भी निर्धारित तिथि का ऐलान नहीं किया है। इसी बीच स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार (School Education Minister Inder Singh Parmar) का बड़ा बयान सामने आया है।

आज मीडिया से चर्चा के दौरान इंदर सिंह परमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी 50% से अधिक जगह पर ऑनलाइन सुविधा से बच्चों की पढ़ाई होना संभव नहीं है पहले हम सुविधाएं जुटाएंगे और उसके बाद ऑनलाइन क्लासेस शुरु करेंगे। कई बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं है और अन्य सुविधाएं नहीं है ऐसे में हम परीक्षा लेते तो यह संभव नहीं था इसलिए व्यवहारिक दृष्टि से इसे देखते हुए फिलहाल इस आदेश को निरस्त किया गया है और जब व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाती जाएंगे तब ऑनलाइन क्लासेस शुरु की जाएगी।

परमार ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार हम नीचे तक के स्कूलों की स्थिति को जानेंगे और उनसे राय लेंगे कि कैसे बच्चों की पढ़ाई संभव हो सके उसके बाद जल्द ऑनलाइन क्लासेज शुरू की जाएंगी। वही ऑनलाइन कालसिस के मामले में अधिकारियों ने जल्दबाजी कि इस पर शिक्षा मंत्री का कहना है कि उन्होंने सोचा होगा कि बच्चों की पढ़ाई हो सके लेकिन वास्तव में स्थिति यह है कि कई ट्राईबल जगह और कई गांव में अभी ऑनलाइन सुविधा नहीं है जब यह पूरी सुविधा हो जाएगी तब जल्दी यह व्यवस्था चालू की जाएगी।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में सोमवार से शुरू होने वाली ऑनलाइन क्लास भी शुरू नहीं हो सकीं। मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति 2020 को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल आमने-सामने हो गए। माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव ने शुक्रवार को आदेश जारी किया था। इस आदेश अनुसार 7 सितंबर से ऑनलाइन क्लास होगी लेकिन आज ऑनलाइन क्लास शुरू नही हुई। अधिकारियों का कहना है कि मंडल का काम परीक्षा लेना और उसके संबंध में नीति निर्धारण करना है। शिक्षा नीति बनाना उनका काम नहीं है। इसी के कारण पीएस स्कूल शिक्षा विभाग ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।

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