नई शिक्षा नीति का मप्र में होगा आदर्श क्रियान्वयन, किताबी ज्ञान के साथ कौशल भी मिले

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन में भारत की नई शिक्षा नीति के तीन प्रमुख उद्देश्यों ज्ञान-कौशल और संस्कार को प्राप्त करने के सोच से तैयार की गई है। मध्यप्रदेश इसका आदर्श तरीके से क्रियान्वयन करेगा। बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें हुनरमंद बनाया जाएगा। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में 600 करोड़ रुपये की लागत से सिंगापुर के सहयोग से ग्लोबल स्किल पार्क के विकास की योजना है। इसके क्रियान्वयन की गति बढ़ाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिस तरह मध्यप्रदेश ने बीते वर्षों में बिजली, पानी और कृषि के क्षेत्र में विकास के नए रिकार्ड बनाए हैं, उसी तरह अब स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ उपलब्धियाँ प्राप्त करने के प्रयास होंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप निर्माण के लिए वेबिनार श्रृंखला के माध्यम से किए जा रहे मंथन के तीसरे दिन स्वास्थ्य और शिक्षा वेबिनार का शुभारंभ कर रहे थे।

किताबी ज्ञान के साथ विद्यार्थियों को कौशल भी मिले
सीएम शिवराज ने कहा केंद्र सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति का मध्यप्रदेश में आदर्श क्रियान्वयन करेंगे। किताबी ज्ञान के साथ विद्यार्थियों को कौशल भी मिले यह लक्ष्य है। शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने पर ध्यान देंगे। नई शिक्षा नीति के आलोक में केन्द्रीय मंत्री श्री निशंक को आश्वस्त करता हूँ कि मध्यप्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन होगा। शिक्षा सर्व सुलभ हो, हर बच्चा स्कूल जाए लेकिन बच्चों पर बस्ते का बोझ न हो, उनका बोझ घटे, यह लक्ष्य| नये स्कूल खोलने फैशन बढ़ गया है, नगण्य विद्यार्थी संख्या के बावजूद विद्यालय प्रारंभ करना उचित नहीं। उन्होंने कहा कोरोना काल में ‘हमारा घर-हमारा विद्यालय’ के अंतर्गत बच्चों को घर बैठे सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षा पहुँचाई गई।

संगीत नृत्य और योग की शिक्षा देना भी प्राथमिकता होगी
सीएम ने कहा प्रधानमंत्री श्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों को कौशल ज्ञान भी दिया जाएगा। नैतिक शिक्षा पर भी हम पर्याप्त ध्यान देंगे। पूर्व में नैतिक शिक्षा पर जोर दिया जाता रहा है। इसे पुन: महत्व दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय तक जाने के लिए सड़क हों, परिवहन साधन भी हों, पर्याप्त स्टाफ हो और लेबोरेटरी भी हों, इस पर ध्यान देंगे । व्यवसायिक शिक्षा के अंर्तगत कक्षा छठवीं से बच्चों के हाथ में कौशल मिले, यह प्रयास होंगे। संगीत नृत्य और योग की शिक्षा देना भी प्राथमिकता होगी। यदि किसी विषय में विशेषज्ञता अर्जित करना तब ही पीजी कक्षा में प्रवेश लें विद्यार्थी। सिर्फ फैशन के लिए मास्टर डिग्री ज्वाइन न करें। आज प्रत्येक स्थान पर कॉलेज के लिए मांग आती है। लेकिन पाठ्यक्रम की उपयोगिता सिद्ध हो, विद्यार्थी इसे ध्यान में रखें। शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी गुणवत्ता में सुधार के प्रयास होंगे। तकनीकी ज्ञान हासिल करने वाले बच्चे शत-प्रतिशत प्लेसमेंट का लाभ लें। सभी कार्यों के लिए प्रायः लोग नहीं मिलते दूसरी तरफ बेरोजगारी की बात सुनते हैं। हमें इस गैप को पाटना है ।

केन्द्रीय मंत्री ने की वेबिनार आयोजन की प्रशंसा
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए वेबिनार का आयोजन प्रशंसनीय है। विचार-विमर्श से महत्वपूर्ण सुझाव मिलते हैं। भारत की नई शिक्षा नीति के लिए करीब सवा दो लाख सुझाव प्राप्त हुए। नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट स्थान पर 5+3+3+4 फार्मेट लागू होगा। श्री निशंक ने बताया कि कक्षा छठवीं से विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई बच्चा शिक्षा से नहीं छूटेगा। करीब ढाई करोड़ विद्यार्थी के ड्राप आउट को समाप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब पहली से पांचवी कक्षा तक मातृभाषा का उपयोग किया जाएगा। विश्व के अनेक देशों में मातृभाषा को इस तरह का महत्व दिया गया है। भारत में पहली बार आठवीं अनुसूची में शामिल भारतीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ा गया है। विद्यार्थी स्वयं का मूल्यांकन करेगा। उसे रिपोर्ट कार्ड नहीं प्रोग्रेस कार्ड प्राप्त होगा। वोकेशनल विषयों को सुनने का विकल्प दिया गया है। विज्ञान के विद्यार्थी भी संगीत और मनोविज्ञान पढ़े सकेंगे। पाठ्यक्रम पूरा न हो पाने पर भी प्रमाण पत्र, डिप्लोमा और डिग्री शिक्षा प्राप्त करने की अवधि के अनुसार प्रदान की जाएगी। स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया के तहत भारत के विद्यार्थियों को प्राप्त शिक्षा भारत के काम आए, यह प्रयास होंगे। अब पाठ्यक्रम नवाचार के साथ लागू होंगे। शोध की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। केन्द्र सरकार ने मिड-डे मील पर 580 करोड़, केंद्रीय विद्यालयों को सक्षम बनाने पर 6495 करोड़, नवोदय विद्यालय की व्यवस्था करने के लिए 803 करोड़ रुपए की राशि दी है। केंद्रीय मंत्री श्री निशंक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश स्थित केंद्रीय संस्थानों को सक्षम बनाकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के टारगेट को पूरा करने में सहयोग दिया जाएगा।