अब नगर निगम की गाड़ियों से डीजल चोरी करना होगा नामुमकिन, निगम को होगा करोड़ों का मुनाफा

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। नगर निगम हर साल डीज़ल में लगने वाली करोड़ों रुपये की चपत से मुक्ति पाने वाला है। नगर निगम भोपाल शहर में अब चार नए डीज़ल पंप खोल रहा है जिससे निगम को अब हर साल करोड़ो रुपये का सीधा मुनाफा होगा।

दरअसल राजधानी को साफ सुथरा रखने से लेकर नगर निगम से संबंधित कामों के लिए लगी निगम की गाड़ियों में हर साल 50 करोड़ रुपए के डीज़ल की खपत होती है। निगम के पास शहर में फिलहाल सिर्फ एक ही डीज़ल पंप है जो माता मंदिर के पास स्थित है। निगम के 19 जोन की सभी गाड़ियां इसी डीज़ल पंप पर जाकर डीजल डलवाती है। बैरागढ़ से लेकर कोकता ट्रांसपोर्ट नगर, दानापानी से आने वाली गाड़ियों को पंप तक आने जाने में 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है जिसमे बेवजह डीज़ल खर्च होता है। इसके अलावा इन गाड़ियों के एक जगह से दूसरी जगह पहुचने पर शहर में ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बनी रहती है।

नए डीजल टैंक का सबसे बड़ा लाभ डीजल की खपत कम होने के तौर पर होगा। अयोध्या बायपास क्षेत्र के वाहन डीजल के लिए लिंक रोड तक नहीं आएंगे। वे अपने क्षेत्र के ही कोकता ट्रांसपोर्ट नगर में ही डीजल ले लेंगे। होशंगाबाद रोड, कोलार, मिसरोद क्षेत्र से जुड़े निगम के वाहन दानापानी ट्रांसफर स्टेशन से तो पुराने भोपाल के आरिफ नगर स्टेशन से डीजल लेंगे। बैरागढ़ ट्रांसफर स्टेशन का लाभ गांधी नगर, बैरागढ़ से जुड़े वार्ड के निगम वाहनों को मिलेगा। निगम को इससे प्रतिमाह 20 हजार लीटर तक डीजल बचत होने की उम्मीद है। इस मामले में नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी बीएस सेंगर ने बताया की काफी समय से नए डीज़ल टैंक खोलने का प्रयास कर रहे थे, अब इंडियन ऑयल कंपनी से करार हुआ है और कुछ ही दिनों में यह डीज़ल टैंक खुल जाएंगे। वहीं नई व्यवस्था से नगर निगम खुद पर लगे डीज़ल चोरी के दाग भी धोने में लगी है। अब गाड़ियों में इन नए डीज़ल पंप पर आरआईएफडी सिस्टम लगा होगा जिससे नोज़ल के ज़रिए ही गाड़ियों का टैंक खुल सकेगा और बंद हो सकेगा। गाड़ी से कोई भी कर्मचारी डीज़ल चोरी नहीं कर पायेगा। साथ ही कितना डीज़ल किस गाड़ी में डाला गया है अधिकारियों को मोबाइल पर पता चल जाएगा।

गौरतलब है कि 2017 में तत्कालीन निगमायुक्त छवि भारद्वाज ने निगम का डीज़ल घोटाला पकड़ा था। जिसमे अफसर ने जितना डीजल लिखा, उतना टैंक से जारी कर दिया जाता था। ये भी नहीं देखा जाता था कि मौजूदा वाहन में इसकी जरूरत है या नहीं। डीजल की सबसे अधिक लूट शाखा प्रभारियों ने की। यानि फायर के इंचार्ज, जलापूर्ति के इंचार्ज, स्वास्थ्य, अधिक्रमण के इंचार्ज शामिल है। लेकिन अब तक किसी पर बड़ी कार्यवाई नहीं हो पाई है। नगर निगम के डीजल टैंक से सालाना 10 लाख लीटर डीजल की चोरी हो जाती थी। अब निगम की कमान वीएस चौधरी ने संभाली है जो नई व्यवस्थाओं पर ज़ोर दे रहे है। उम्मीद यही है कि नई व्यवस्थाओँ से जल्द ही सुधार आएगा।

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