अब नहीं भेजना होगा सैम्पल दूसरे राज्य, प्रदेश में ही होगी जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच

कोरोना के इस नए वेरिएंट के सामने आने के बाद से अब तक राज्य के सैंपलों को जीनोम सिक्वेसिंग के लिए दिल्ली भेजा जाता था, जिसकी रिपोर्ट 10 से 12 दिन बाद आती थी, लेकिन जैसे ही जीनोम सिक्वेंसिंग करने वाली ये मशीन राज्य में लग जायेंगी, जांच रिपोर्ट जल्दी मिल जायेगी।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए मध्य प्रदेश को पांच मशीने दी है हालांकि, प्रदेश में अब तक ओमीक्रॉन संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है। उसके बावजूद पहले से ही ओमिक्रान से निपटने यह मशीनें राजधानी भोपाल, इंदौर समेत कुल पांच जिलों के लिए सौंपी गई है।

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प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की, इस मुलाकात में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने मध्य प्रदेश को कोरोना वायरस के हर स्वरूप की जांच करने में सक्षम जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पांच मशीन दी है, ये मशीन भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लगाई जाएंगी।

कोरोना के इस नए वेरिएंट के सामने आने के बाद से अब तक राज्य के सैंपलों को जीनोम सिक्वेसिंग के लिए दिल्ली भेजा जाता था, जिसकी रिपोर्ट 10 से 12 दिन बाद आती थी, लेकिन जैसे ही जीनोम सिक्वेंसिंग करने वाली ये मशीन राज्य में लग जायेंगी, जांच रिपोर्ट जल्दी मिल जायेगी। मध्य प्रदेश में फिलहाल कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रॉन का कोई मामला नहीं है। देश में कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन की एंट्री के बाद से प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है, सरकार ने तीसरी लहर की तैयारी को लेकर जिलों में अस्पतालों में तैयारी रखने के निर्देश भी दिए हैं, भोपाल में जेपी अस्पताल और हमीदिया अस्पताल में पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार की जा रही है।

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क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग

जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है।

सरल भाषा में कहें तो जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है। असल में, मानव कोशिकाओं के भीतर आनुवंशिक पदार्थ होता है जिसे डीएनए, आरएनए कहते हैं। इन सभी पदार्थों को सामूहिक रूप से जीनोम कहा जाता है। वहीं स्ट्रेन को वैज्ञानिक भाषा में जेनेटिक वैरिएंट कहते है। सरल भाषा में इसे अलग-अलग वैरिएंट भी कह सकते हैं। इनकी क्षमता अलग-अलग होती है। इनका आकार और इनके स्वभाव में परिवर्तन भी पूरी तरह से अलग होता है।