CM हाउस का घेराव करने पहुंचे नर्सिंग छात्र, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन, भारी पुलिस बल तैनात

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भोपाल।

कर्मचारियों, किसानों के बाद अब नर्सिंग कॉलेज की छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।मान्यता रद्द करने के चलते आज सभी छात्र मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने सीएम हाउस पहुंचे।जहां उन्होंने मान्यता रद्द करने का विरोध किया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सीएम ने उनसे मुलाकात की और आश्वासन दिया ।लेकिन छात्रों का कहना है कि सरकार लगातार आश्वसन पर आश्वसन दे रही है लेकिन कोई कार्रवाई नही की जा रही है। इससे पहले छात्रों को भारी संख्या में आता देख पुलिस ने सीएम हाउस की सुरक्षा बढ़ा दी थी, किसी को भी अंदर जाने नही दिया जा रहा था।

छात्रों का कहना है कि जिस तरह से मान्यताए बीच सेशन में रद्द की जा रही है, उससे 127 कॉलेज के 14 हजार बच्चे का भविष्य खतरे मे आ जाएगा।सरकार को बीच सेशन मे यह नियम लागू करने से पहले सोचना था, आखिर बीच सेशन में क्यों लागू किए गए यह नियम। सभी छात्र इसका विरोध कर रहे है और इसी सिलसिले में यहां सीएम से मिलने पहुंचे थे, उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड नही किया जाएगा।लेकिन छात्र इस बार आश्वासन नही मांगे पूरी होने पर ही मानेंगें। हर बार आश्वसन दे दिया जाता है, इस बात को आज छह महिने बीतने को है, जुलाई से अगला सेशल शुरु हो जाएगा, ऐसे में छात्रों का भविष्य खतरे में है।

प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के अध्यक्ष मिलन सिंह ने कहा कि नई सरकार से हमें बहुत उम्मीदें है , लेकिन आश्वासन के बजाय सरकार से हमारी मांग है कि जल्द से जल्द इस मान्यता को रद्द किया जाए। 

गौरतलब है कि बीते जनवरी में सरकार ने नर्सिंग कॉलेजों के नए नियम लागू किए थे।जिसके तहत  मप्र में उसी नर्सिंग कॉलेज को अब प्राथमिकता के आधार पर मान्यता मिलेगी, जिसके पास खुद का अस्पताल हो। तीन बेड पर एक नर्स हो और साल में वहां उसे 1200 घंटे का अनुभव मिल जाए। उसी आधार पर सीट भी तय होंगी। यह प्रावधान भी डाला जा रहा है कि मप्र में नर्सिंग कॉलेज चलाना है तो मप्र नर्सिंग काउंसिल से मान्यता भी लेनी पड़ेगी। वह चाहे तो इंडियन नर्सिंग काउंसिल की भी मान्यता के लिए आवेदन कर सकता है। अगर ऐसा नही होता है उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।जिसका विरोध छात्र कर रहे है, क्योंकि सेशल जुलाई से शुरु हुआ था और नियम जनवरी में लागू किए गए, जिससे मान्यता रद्द होने पर प्रदेश के 127  कॉलेजों के करीब दस हजार छात्रों का भविषय खतरे में आ गया है।

नियमों के नए प्रारूप के अनुसार ये होंगे मान्यता के मुख्य प्रावधान

1. पाठ्यक्रम के हिसाब से मान्यता दी जाएगी। 4 वर्ष तक हर साल लेनी होगी। 

2. चार वर्ष के बाद सीधे अगले चार साल की मान्यता मिलेगी। 

3. पाठ्यक्रम के अनुसार पंजीकृत छात्रों का उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 70 से कम है अथवा प्रदेश के औसत से घट गया है तो उसकी मान्यता नहीं रहेगी। 

4. एक जिले में एक से अधिक कॉलेजों की मान्यता का आवेदन मिलता है तो उसी कॉलेज को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसका खुद का अस्पताल हो। दूसरे नंबर ट्रस्टी व अन्य द्वारा संचालित अस्पताल का मौका मिलेगा। 

5. आवेदन के चरण में ही सारी शर्तें व प्रावधान पूरे करने होंगे। बाद में निरीक्षण के उपरांत मान्यता का कोई झंझट नहीं रहेगा। विभाग की ओर से एक निरीक्षक जाकर यह देखेगा कि आवेदनकर्ता ने आवेदन में जो बातें बताई हैं अथवा डॉक्यूमेंट दिए हैं वह सही हैं या नहीं। 

6. अस्पताल अंदर और बाहर की फोटो भी आवेदन के साथ लगानी पड़ेगी। 

7. मान्यता देने अथवा रद्द करने का निर्णय मप्र नर्सिंग काउंसिल की खुली बैठक में लिया जाएगा, जिसकी अध्यक्ष विभागीय मंत्री करेंगे।