अदालत का आदेश रद्दी, मंत्री की सिफारिश भी टोकरी में!

भोपाल। खान अशु।

कोई अफसर किसी कर्मचारी को परेशान करने पर उतर जाए तो वह नियमों की तह-दर-तह अवमानना करने में भी पीछे नहीं हटता। अदालत के आदेशों को नजरअंदाज करने और अपनी मनमर्जी चलाने की इंतेहा यह है कि इन अधिकारियों ने मौजूदा सरकार के मंत्रियों की सिफारिशों को भी डस्टबीन के हवाले कर दिया है। हालात यहां तक पहुंचे हैं कि इंसाफ की गुहार लगा रही महिला लेखा अधिकारी को लंबे समय से वेतन से ही महरूम कर दिया गया है।

मामले की शुरूआत करीब तीन साल पहले हुई। इसके केन्द्र में जिला पंचायत रायसेन के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी और इसी विभाग की एक महिला अधिकारी है। सूत्रों का कहना है कि विभाग के तत्कालीन रंगीन मिजाज अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी राकेश गौतम ने इस महिला लेखा अधिकारी के साथ छेड़छाड़ कर दी।  लेकिन महिला ने छेड़छाड़ का जवाब शिकायत से दिया और इस किस्से को मौजूदा सीइओ जिला पंचायत पीसी शर्मा एवं कलेक्टर रायसेन जनक जैन तक पहुंचा दिया। अधिकारी का झुकाव, अपने कनिष्ठ अफसर की तरफ ही रहा और उन्होंने महिला अधिकारी की शिकायत को रफा-दफा कर दिया। अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार से प्रताड़ित महिला अधिकारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। जिस पर अदालत ने अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी राकेश गौतम को कुसूरवार मानते हुए उसके खिलाफ भादवि की धारा 354 अ एवं 354द के 506, आइपीसी 34 के तहत मामला दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए। 

क्रिया की हुई प्रतिक्रिया

महिला अधिकारी द्वारा अदालत से एफआईआर आदेश पारित करवाने की बात से नाराज अधिकारियों ने महिला अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिसके बाद उन्हें एक दफ्तर से दूसरे कार्यालय और एक शहर से दूसरे नगर की दौड़ लगवाना शुरू कर दी गई। इस कार्यवाही के लिए अधिकारियों ने महिला अफसर के खिलाफ  झूठे मामले लादने में भी कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों को चैलेंज करते हुए इसकी जांच शुरू करवा दी। सूत्रों का कहना है कि जिस शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर उन्हें अयोग्य और काम के लिए अक्षम करार दिया जा रहा था, उससे भी कमतर दस्तावेजों के आधार पर जिला पंचायत के मनरेगा शाखा में कई अन्य 1300 कर्मचारी निश्चित होकर काम कर रहे हैं। 

अदालत के आदेश से बड़ा शासकीय मार्गदर्शन

जांच के घेरे में लेकर महिला अधिकारी को पहले रायसेन से हरदा हरदा से राजगढ़ स्थानांतरित किया गया। उसके बाद बिना जांच किए सामने आई रिपोर्ट के आधार पर काम के लिए अक्षम मानते हुए पहले निलंबित किया गया और बाद में उनकी सेवाएं ही समाप्त कर दी गईं। इस आदेश के खिलाफ  महिला अधिकारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने उसके पक्ष में फैसला देते हुए उसकी बहाली का फरमान जिला पंचायत को थमा दिया। अदालत के इस फैसले को जिला पंचायत अधिकारियों ने दरकिनार करते हुए शासन से निर्देश लेने के नए आदेश जारी कर दिए हैं। जिसका नतीजा यह है कि महिला अधिकारी की अपनी सेवा पर वापसी तो हो गई है, लेकिन उसे लंबे समय से वेतन नहीं मिल रहा है। इस मामले को लेकर महिला लेखाअधिकारी जिला पंचायत सीइओ, राजगढ़ को करीब डेढ़ दर्जन अर्जियां लिख चुकी हैं, लेकिन उन्हें मौखिक रूप से जवाब दिया जाता है कि अदालत ने उनके टर्मिनेशन को निरस्त करने के आदेश दिए हैं, लेकिन इस आदेश में इस बात का जिक्र नहीं है कि इस सेवा के बदले उन्हें वेतन दिया जाए अथवा नहीं।

अब दायर होगी अदालत की अवमानना 

अदालत द्वारा विभाग के सारे आरोपों को खारिज करते हुए और इसके द्वारा की गई जांच पर उंगलियां उठाते हुए महिला लेखाअधिकारी की बहाली के आदेश दिए गए हैं। लेकिन विभाग ने उन्हें पद पर लेने के बाद वेतन देने में कोताहियां बरतना शुरू कर दी हैं। महिला अधिकारी इस मामले को अदालत की अवमानना मानते हुए इस बात की गुहार उच्च न्यायालय में लगाई  हैं।

हम सबसे बड़े नेता, नेताओं का क्या डर

महिला अधिकारी के साथ अश्लीलता और अभद्रता करने वाले तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी राकेश गौतम को इस बात का दंभ बताया जाता है कि उनके भाजपा नेताओं से गहरे रिश्ते हैं। इन्हीं रिश्तों के आधार पर उन्होंने रायसेन से भोपाल में एक बड़े विभाग में अपना स्थानांतरण करवा लिया है। यही वजह है कि महिला अधिकारी द्वारा जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ  अकील और राजगढ़ जिले के स्थानीय नेता और नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह से की। बावजूद इसके उक्त अधिकारी के खिलाफ न तो कोई कार्यवाही ही हो पा रही है और न ही उसका रुका हुआ वेतन ही मिल पा रहा है।

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