स्कूलों में नहीं चलेंगे सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले वाहन, PHQ ने जारी किया फरमान

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भोपाल। प्रदेश में स्कूलों वाहनों में हादसों को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को सुरक्षा मानकों को पूरा कराने का फरमान जारी किया है। जिसमें कहा है कि स्कूलों बच्चों को ढोने वाले वाहन यदि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के काम में न चलने दें। ऐसे वाहनों के खिलाफ कड़ाई से पालन कराएं। पीएचक्यू ने इंदौर, भोपाल डीआईजी समेत सभी एसपी को यह निर्देश जारी किए हैं। 

पीएचक्यू ने जिलों केा भेजे पत्र में कहा है कि स्कूली बच्चों के परिवहन के दौरान बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो। स्कूली वाहनों के संचालन के संबंध में  माननीय  सर्वोच्च  न्यायालय द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाय। पुलिस अधीक्षको को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिले के प्रत्येक थाने के अंतर्गत स्कूली वाहनों की नियमित जांच कराकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कराएं। विशेष पुलिस महानिदेशक पीटीआरआई शर्मा ने प्रपत्र में स्पष्ट किया है कि वाहनों की चेकिंग के दौरान बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होना चाहिए। साथ ही इस बात का ध्यान रखा जाय कि बस संचालक भी कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों व पालकों को परेशान न करें। उन्होंने परिपत्र में जिक्र किया है कि वाहन मालिक,  वाहन चालक, परिचालक व स्कूल प्रशासन की गलती की वजह से होने वाली स्कूली बसों की दुर्घटनाओं का खामियाजा बच्चों व उनके अभिभावकों को  भुगतना पड़ता है । साथ  ही जनमानस में पुलिस के प्रति विपरीत छवि निर्मित होती है। इसलिए पुलिस पूरी गंभीरता के साथ वाहनों की चेकिंग करे। पीएचक्यू ने इस संबंध में राज्य शासन को पत्र लिखकर समस्त शासकीय एवं अशासकीय स्कूलो में निर्देशो का पालन आवश्यक रूप से कराए जाने हेतु लिखा है।

स्कूल खुलते ही शुरू होगी जांच

पीएचक्यू के निर्देश पर जिला पुलिस ने भी स्कूली वाहनों की जांच की तैयारी कर ली है। 15 जून के बाद स्कूलों में अध्यापन का काम शुरू होगा। इसके साथ ही पुलिस वाहनों की जांच करेगी। खासकर गैस से चलने वाले वाहनों को स्कूली बच्चों के परिवहन से अलग किया जाएगा। वाहन की फिटनेस से लेकर सभी तरह की गाइडलाइन का ध्यान रखा जाएगा। जांच अभियान में शिक्षा, राजस्व एवं परिवहन विभाग की टीम भी पुलिस के साथ रहेगी। 

यह है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

स्कूल बस के आगे व पीछे बड़े एवं पढऩें योग्य अक्षरों में स्कूल बस लिखा जाये। यदि बस किराये की है तो उस पर आगे एवं पीछे विद्यालयीन सेवा (ऑन स्कूल ड्यूटी) लिखा जावे। विद्यालय के लिए उपयोग में लायी जाने वाली किसी भी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चे नहीं बैठाए जाएँ। प्रत्येक बस में अनिवार्य रूप से फसर््ट एड बाक्स की व्यवस्था हो। बस की खिड़कियों में आड़ी पट्टियॉ (हॅारीजेंटल ग्रिल) अनिवार्य रूप से फिट होना चाहिए। प्रत्येक बस में अग्नशिमन यंत्र की व्यवस्था हो। बस पर स्कूल का नाम एवं टेलीफोन नंबर अवश्य लिखा हो। बस के दरवाजे पर सुरक्षित सटकनी लगी हो।वाहन चालक को भारी वाहन चलाने का न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए तथा  वाहन चालक पूर्व में ट्रॅाफिक नियमों के उल्लघंन का दोषी नहीं ठहराया गया हो। मोटर वाहन नियम 17 के अनुसार प्रत्येक बस में बस चालक के अतिरिक्त एक अन्य योग्य व्यक्ति की व्यवस्था होना चाहिए। बच्चों के बस्ते रखने के लिए सीटों के नीचे जगह की व्यवस्था की जानी चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को ले जाते समय बस में एक व्यक्ति एस्कॉर्ट तथा एक शिक्षक की व्यवस्था भी होना चाहिए।

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