ठगों की मोबाइल लोकेशन तलाश रही पुलिस, 11 माह बाद हुई थी एफआईआर

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भोपाल। छात्र के साथ में ठगी करने वालों के खिलाफ 11 महीने बाद प्रकरण दर्ज करने वाली पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल नंबरों की डिटेल निकाल रही है। उनकी लोकेशन खंगाली जा रही है। हालांकि सभी नंबर काफी समय पहले ही बंद हो चुके हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों का अभी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। 

गौरतल��� है कि ग्वाल मोहल्ला रोशनपुरा निवासी अंजू भगत (40) मेहनत मजदूरी करती हैं। उनका बेटा जयप्रकाश (18) ने इसी साल दसवीं पास की है और न्यू मार्केट में एक कपड़े की दुकान पर काम करता है। पिछले साल 20 अगस्त 2018 को जयप्रकाश के मोबाइल पर एक कॉल आया था। फ ोन करने वाले ने उसे बताया कि मोदी सरकार बननने के उपलक्ष्य में उसका जिओ का मोबाइल नंबर लकी ड्रा के लिए चुना गया है। उसे 25 लाख रुपये ईनाम देने की बात कहते हुए बड़े अधिकारी से बात करने को बोला गया। जयप्रकाश ने जब बताए गए नंबर पर बात की तो खुद को राणा प्रताप सिंह बताने वाले अधिकारी ने उससे एकाउंट नंबर और फ ोटो मांगा और दस हजार दो सौ रुपए जमा करने को कहा। छात्र ने बताए अकांउट नंबर में ऑन लाइन रुपए जमा कर दिए। इसके बाद कहा कि चेक पर साइन होने के दस मिनट बाद आपके खाते में उक्त रकम जमा कर दी जाएगी। फिर बोला गया कि 25 लाख की रकम जमा करने के कारण आपको इनकम टैक्स देना होगा। इस कारण आपको एक खाते में 25 हजार रुपये जमा करने होंगे। यह रुपये भी जमा करने के बाद छात्र से करेंट एकाउंट खुलवाने के नाम पर 45 हजार जमा कराए। अगले दिन रकम डालर में होने की बात कहते हुए भारतीय मुद्रा में बदलने के नाम पर 10 हजार और फिर रकम ट्रांसफर के नाम पर 10 हजार रुपए जमा करा लिए। इस प्रकार से आरोपियों ने कुल एक लाख पांच हजार रुपये जमा कराए। यह रकम छात्र ने अपने दोस्तों व परिचितों से उधार लेकर जमा किए थे।

एफआईआर होने में लगे ग्यारह महीने

जयप्रकाश ने बताया कि ठगी की वारदात के बाद उसने 27 अगस्त 2018 को थाना जहांगीराबाद व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायत की थी। लेकिन थाना पुलिस ने उसे यह कहते हुए थाने से चलता कर दिया कि इस मामले की सायबर सेल जाकर शिकायत करो। वहीं कारज़्वाई करेंगे। इसके बाद जब वह सायबर सेल पहुंचा तो वहां उससे कहा गया कि थाना पुलिस से लिखित में लेकर आओ। इसके अलावा उसकी क्राइम ब्रांच में भी सुनवाई नहीं हुई। यहां-वहां भटकने के बाद जहांगीराबाद पुलिस ने लिखित आवेदन तो ले लिया। लेकिन पुलिस को इस मामले में आरोपियों के खिलाफ  एफआईआर दर्ज करने में ग्यारह माह लगे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ  धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।