सर्जिकल स्ट्राईक..हनुमान भी हुऐ थे परेशान!…’हमका माफी दई दे’

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भोपाल| पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान की जमीन पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर देश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है| एयर स्ट्राइक के बाद विपक्षी दलों की तरफ से सवाल पूछे जाने लगे हैं, वहीं  मारे गए आतंकियों के अलग-अलग आंकड़े बीजेपी नेताओं द्वारा बताए जा रहे हैं। जिसको लेकर भी बयानबाजी का दौर नहीं थम रहा है| इस दौर में सेना से लेकर देश की सुरक्षा तक को कटघरे में खड़ा कर दिया गया है| लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हो रही इस छींटाकशी की होड़ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं| क्या वाकई सेना की कार्रवाई पर इस तरह सवाल उठाये जाना जायज है, क्या इस मुद्दे पर अब और राजनीति होना सही है, इन्ही तमाम मुद्दों पर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक बहस जारी है| इसी मुद्दे पर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और सहारा समय के ब्यूरो प्रमुख वीरेंद्र शर्मा ने अनूठे अंदाज में व्यंग सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है..

सर्जिकल स्ट्राईक..हनुमान भी हुऐ थे परेशान(हमका माफी दई दे)

लंका दहन करने के बाद वापस लौटे पवन पुत्र ने भगवान राम को यात्रा संबंधी वृतान्त बताने के बाद अभी चैन की सांस ली ही ली थी आरोपों प्रत्यारोपों के दौर शुरू हो गए। दरअसल हनुमान की राम से निकटता और लगातार बढ़ती लोकप्रियता एक बड़े वानर समूह को पच नहीं रही थी सो हनुमान की लंका यात्रा को लेकर उंगलिया उठनी शुरू हो गयी। वर्षों से काम-धाम किए बिना खा पीकर मुटिया रहे सवा क्विंटल के एक वानर ने कहा “लंका में आग हनुमान के द्वारा नहीं लगाई गई बल्कि एक राक्षसी द्वारा गैस सिलेंडर खुला छोड़ने से गैस रिसने के कारण लगी जिसने बाद में व्यापक रूप ले लिया और लंका का बड़ा भाग जलकर खाक हो गया। और अगर आग हनुमान लगाते तो क्या उनका शरीर नहीं जलता। दूसरे वानर ने कहा “आग प्रतिरोधी एस्बेस्टस अगर हनुमान ने अपनी पूंछ में लगाया था तो उसकी खरीदी के प्रमाण प्रस्तुत करें।” तीसरे वानर ने तो इससे भी ज्यादा बढ़कर हमला बोला “कहां f 16 जैसे विशालकाय राक्षस और कहां यह मिग सा हनुमान। लंका नरेश के बेटों को मारने के बाद और इतनी तबाही के बाद इसका सकुशल लौट आना ही संदेह को जन्म देता है। और अगर इतना पराक्रमी था तो सीता जी को साथ क्यों नहीं ले आया।” आधुनिकता की परिवेश में रचे पले एक युवा वानर ने तो हनुमान और रावण की कॉल डिटेल स्टडी की मांग कर डाली। आरोप लगाया गया कि रावण के साथ हनुमान ने गुप्त समझौता कर लिया और बदले में सात पीढ़ी के लिए लंकाई पेड़ों पर जम कर मस्ती करने के साथ-साथ निशुल्क फल फूल पाने का आश्वासन भी मिल गया। हनुमान पर लगे इन आरोपों ने राम तक को संशय में डाल दिया। विश्व की पहली सर्जिकल स्ट्राइक पर गए हनुमान को इन आरोपों से मुक्ति तब मिली जब लंका में रावण वध के बाद विभीषण और सीता जैसे अकाट्य सबूतों ने उनके पक्ष में गवाही दी।