भोपाल। राजधानी का इकबाल मैदान सत्याग्रह गुरूवार को एक नई रंगत में नज़र आया। सभी धर्मों के धर्मगुरूओं, सियायत के बड़े चेहरों, सहाफत के नए आयाम खड़े करने वाले, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और स्टुडेंट्स पॉवर एकसाथ दिखाई दे रहे थे। अलग-अलग शहरों और विभिन्न क्षेत्रों से आए सभी लोगों की जुबान पर एक ही बात थी एनआरसी-सीएए का विरोध, काले कानून का बहिष्कार, तालीमी इदारों पर सरकारी र्गुडागर्दी और इन सब हालातों को बदलने की ललकार। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और हर वर्ग, तबके, धर्म, सम्प्रदाय के लोगों से लबालब भरे इकबाल मैदान ने नई तहरीर लिखते हुए ऐलान कर दिया कि अब हर गांव, हर शहर और हर चौराहे पर शाहीन बाग नजर आएगा।

सीएए-एनआरसी को लेकर देशभर में जारी विरोध सभाओं के बीच राजधानी के इकबाल मैदान में गुरूवार को विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रतिरोध सभा का आयोजन किया। इसकी खासियत कार्यक्रम में शामिल विभिन्न धर्मों के धार्मिक विद्वान, सियासी ओहदेदार, बड़े पत्रकार और जेएनयू, जामिया आदि कॉलेजों से आए स्टुडेंटस थे। दोपहर करीब 3 बजे शुरू होने वाले कार्यक्रम के लिए दोपहर दो बजे बाद से ही श्रोताओं का यहां आना शुरू हो गया था। जबकि व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने सुबह से ही कमान संभाल ली थी। समय की पाबंदी के बाद शुरू हुए कार्यक्रम में लोग देर शाम तक वक्ताओं की बात को सुनते नजर आए और बीच-बीच नारों और बुलंद आवाज से वक्ताओं और शहर को अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराते रहे। कार्यक्रम में शिया समुदाय के मौलाना राफे, मुफ्ती अता उल्लाह, आर्च बिशप, भंते राहुल, काजी अमान उल्लाह, नर्मदा बचाओ आंदेालन की नेत्री मेघा पाटकर, कम्युनिस्ट शैलेन्द्र शैली सहित बड़ी तादाद में मेहमान मौजूद थे। कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील और विधायक आरिफ मसूद भी मौजूद थे। अंतर्राष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली भी खासतौर से इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाए गए थे।

जेएनयू की छात्रा आइशी घोष खासतौर से कार्यक्रम के बुलाई गई थी। अपनी बात की शुरूआत उसने भोपाल की मुहब्बतों का शुक्रिया अदा करने के साथ की। आइशी ने कहा कि वह भोपाल की चिंगारी से जेएनयू की आग बरकरार रखना चाहती हैं। छात्र आंदोलन में जेएनयू के स्टुडेंट रोहित वेमुला को आगे रखते हुए उन्होंने बात को आगे बढ़ाया। आइशी ने कहा कि मौजूदा सरकार अंग्रेजों की लोगों को टुकड़ों में बांटों और राज करो की नीति पर काम कर रही है। उसने अंदरुनी आतंकवाद के हालात देश में पैदा कर दिए हैं। आइशी ने दोगली सरकार की बातों और कर्मो को अलग-अलग बताते हुए काला धन वापसी और देशद्रोहियों के मुल्क से बाहर नहीं होने पर सवाल उठाए। उसने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सरकार चाहती है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में तालाबंदी कर सरकार लोगों से रोजगार मांगने का अधिकार छीनना चाहती है। उसने कहा कि जेएनयू में ताला डाल दिया तो भी रोजगार की मांग खत्म होने वाली नहीं है। आइशी ने कहा कि हम पढ़ेंंगे भी, औऱ हक की आवाज भी उठाते रहेंगे। आइशी ने कहा कि आजाद देश में आजादी का नारा लगाने के हालात बना दिए गए हैं और इस पर भी पाबंदियां आयद की जा रही हैं, विरोध को दमनपूर्वक दबाया जा रहा है, लेकिन यह मुल्क आजाद है और यहां आजादी के नारे लगते रहेंगे, जब तक कि इस देश को काले कानून से आजादी न मिल जाए। आइशी ने नागरिकता प्रमाण पत्र मांगने की बात पर कहा कि अगर हम इस देश के नागरिक नहीं हैं तो वोट सरकार में बैठे इन्हीं लोगों ने 2019 में वोट किससे मांगे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस इस बात को साबित करे कि इस देश की आजादी और इसको बनाने में सावरकर का क्या योगदान है। उसने कहा कि सावरकर का योगदान यही है कि उसने अंग्रेजों से माफी मांगने और उनके तलुए चाटने के अलावा कोई काम नहीं किया है।

जनता ने नेताओं को चुना, अब नेता वोटर चुन रहे हैं : आरफा खानम
द वायर की बेबाक पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने इकबाल मैदान की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस मैदान पर एक शाईन मौजूद है और शाईन की खासियत यह होती है कि वह सिर्फ हिन्दुस्तान में ही पाई जाती है। इसकी खासियत यह भी है कि यह अपना मुल्क छोड़कर कभी नहीं जाती। इसलिए देश में बने ताजा हालात में घरों से निकल आईं शाहीनों को भी इस बात का ऐलान करना चाहिए कि वे इस मुल्क की हैं और यहां से कभी लौटने वाली नहीं, उन्हें कभी कोई बाहर नहीं निकाल सकता। आरफा ने कहा कि यह देश गांधी के नाम से जाना जाता है, वे इस देश के ब्रांड एम्बेसेडर हैं, गोडसे बुरे रूप में जाना जाता रहा है और उसको कभी दुनिया में कहीं सम्मान नहीं मिल सकता। गोडसे को सम्मान देने या दिलवाने की कोशिश करने वालों की हार ही होगी। उन्होंने कहा कि गांधी कभी मरते नहीं, वे लोगों के दिलों में हमेश जिंदा रहते हैं। यही वजह है कि आज लोग उनके तरीके से सत्याग्रह कर रहे हैं। साथ ही यह पैगाम भी दे रहे हैं कि हम साइलेंट भी नहीं होंगे और हम वायलेंट भी नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि हम गांधी के सच्चे वारिस हैं, गोडसे की सोच रखने वाले बिलबिला रहे हैं और अपनी सोच के साथ ही बुरे अंजाम तक पहुंच जाएंगे। आरफा ने इकबाल मैदान के एक माह पूरा कर चुके सत्याग्रह को देखते हुए कहा कि इस एक माह में आपके-हमारे दिलों में जोश कम हुआ होगा, नाउम्मीदी भी आई हो सकती है लेकिन इस दौरान हमें कभी किसी का खौफ नहीं सताया। हमारा किसी खौफ के बिना खड़े रहना ही तानाशाह की असल हार है। आरफा ने कहा कि यह अजब तरह का माहौल देश में दिखाई दे रहा है कि अब तक वोटर अपना नेता और सरकार चुनते आए हैं, अब नई कवायद यह हो गई है कि नेता अपने वोटर चुनने की कोशिश कर रहे हैं। नेता कह रहे हैं कि वे तय करेंगे इस देश का वोटर, यहां की जनता और बाशिंदे। तानाशाही के आलम ने देश की राजधानी से लेकर हर छोटे-बड़े शहर में शाहीन बाग खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस विकट स्थिति ने यह जरूर किया है कि देश की जनता को एकसाथ खड़ा कर दिया है और नीयतखोरों की बांटने की कवायद धरी रह गई है। उन्होंने कहा कि संविधान बाकी रहेगा तो गीता भी बचेगी और कुरआन भी।

हो कयामत भी तो हिजरत नहीं कर सकता : मंजर भोपाली
कार्यक्रम को अंतर्मुखी बनाने की कवायद के साथ इसमें अंतर्राष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली को भी शामिल किया गया था। कम समय में मंजर भोपाली ने अपनी कई ओजस्वी और लोगों में जोश भर देने वाली गजलों से लोगों का दिल लूट लिया। उन्होंने, जुल्म वालों से मोहब्बत नहीं कर सकता मैं, इन गुनाहगार की इज्जत नहीं कर सकता मैं, इतनी प्यारी है मुझे अपने वतन की मिट्टी, हो कयामत तो भी हिजरत नहीं कर सकता मैं, सुनाई तो इकबाल मैदान तालियों और वाहवाह की आवाजों से भर गया। इसके बाद उन्होंने ज़ुल्म जब हद से गुजरता है फना होता है…, जुल्म करने वालों की कुर्सियां जला देना…. और रंग रंग के सांप हमारी दिल्ली में… जैसी गजलों से भी माहौल को सरगर्मी से भर दिया।

एक मंच पर दोनों आरिफ
सियासी अदावतों से घिरे माने जाने वाले प्रदेश के दो दिग्गज मुस्लिम नेता गुरूवार को इकबाल मैदान के कार्यक्रम में एक मंच पर दिखाई दिए। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील और विधायक आरिफ मसूद ने न सिर्फ एक मंच पर लंबा समय साथ बिताया, बल्कि एक खास अभियान के तहत किए गए इस कार्यक्रम को लेकर अपनी बात भी रखीं। दोनों नेताओं ने एनआरसी-सीएए के विरोध में चलाए जा रहे अभियान का समर्थन करने का वादा किया। साथ ही सभी कार्यक्रमों को अपनी तरफ से पूरी मदद करने का आश्वासन भी दिया। सूत्रों का कहना है कि इकबाल मैदान कार्यक्रम से पहले आरिफ अकील और आरिफ मसूद ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रदेशभर में जारी विरोध कार्यक्रमों की जानकारी दी और इस बात के लिए आश्वस्त किया कि प्रदेश में जारी आयोजनों के बीच यहां की शांति व्यवस्था को किसी तरह का खतरा नहीं है। कार्यक्रम को सबा, जामिया स्टुडेंट जाकिर रियाज, चंदा आदि ने भी संबोधित किया।

दी गई गांधी जी को श्रद्धांजलि
30 जनवरी महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर इकबाल मैदान सभा के बीच शाम 5 बजकर 17 मिनट पर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम को बीच में रोककर दो मिनट का मौन रखा गया। इससे पहले उनके लिए एक कविता भी सुनाई गई।

मंच के पीछे लहराया तिरंगा प्यारा
इकबाल मैदान के मुख्य मंच पर जारी कार्यक्रम के दौरान युवाओं की एक टोली मैदान के पीछे स्थित इमारत पर चढ़ गया। जिस समय आरफा खानम अपना वक्तव्य दे रही थीं, उस दौरान यह झंडा लहराया जाने लगा और देर तक युवा इस झंडे को थामे खड़े रहे।