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भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने भाजपा सांसद राकेश सिन्हा के आरोपो के जवाब में पलटवार करते हुए कहा कि अपने खिलाफ जांच से बचने के लिए भाजपा सांसद और आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने जिस तरह से माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी के कुठियाला (जो आरएसएस के सदस्य हैं) की आर्थिक अनियमितताओ,शराब के बिलों के मामलों के बचाव में जिस तरह से शनिवार को पत्रकार वार्ता आयोजित कर मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आरोप लगाए हैं उससे स्पष्ट हो गया है की चौकीदार ही चोर है।

सलूजा ने कहा कि भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने स्वयं माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय से छह महीनों के भीतर बिना पढ़ाए लाखों रुपए का भुगतान लिया। जब यह चोरी पकड़ी गई और उन पर ईओडब्ल्यू की जांच शुरू हो गई तब उन्हें अचानक से नैतिकता और शिक्षा के राजनीतिकरण की याद आ गई। राकेश सिन्हा बताएं की पत्रकारिता विश्वविद्यालय का राजनीतिकरण किसने किया। पिछले 15 सालों के दौरान जिस तरह से पूर्व कुलपति कुठियाला ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आरएसएस के अनुशांगिक संगठनों पर पैसा लुटाया, वह क्या था। नागपुर, बंगलुरु और राज्य के बाहर जिस तरह से राजनैतिक और आरएसएस के कार्यक्रमों की फंडिंग विश्वविद्यालय की तरफ से हुई, वह क्या था।

अपनी पोल खुलने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के विरुद्ध जिस तरह से आज मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं। उन पर किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है। विधायकों के भाजपा में जाने की गीदड़ भभकी कई बार मुख्यमंत्री को भाजपा नेताओं ने दी है। क्या हुआ,सभी जानते हैं। सिन्हा को अपनी चिंता करनी चाहिए। सिन्हा केवल भ्रष्टाचार की जांच को भटकाने के लिए यह हथकंडे अपना रहे है। सलूजा ने कहा कि सिन्हा और उनकी पार्टी और उनके साथ खड़े तथाकथित बुद्धिजीवियों को याददिलाना उचित होगा की रोहित वेमुला, गुजरात में दलितों का उत्पीडऩ और पुणे में किस तरह से दलितों की पिटाई भाजपा की सरकारों ने की हैए वह किसी से छिपा नहीं है।

सिन्हा अपने साथियों के खिलाफ एफआईआर हो जाने से इतने बोखला, कि उन्हें दिल्ली से भोपाल आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करना पड़ी। वे यह तक भूल गए कि मध्यप्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय के अधिनियम के अनुसार चयन समिति गठित कर कर कुलपति नियुक्त किया है। पिछले कुलपति जगदीश उपासने भी इसी तरह की प्रक्रिया से नियुक्त हुए थे। चयन समिति में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के तीन प्रतिष्ठित पत्रकार थे। वैसे आरएसएस के जुड़े पूर्व कुलपति कुठियाला की विश्वविद्यालय के पैसे से शराबखोरी के मामले के सामने आने के बाद उसको उचित ठहराने के प्रयास में की गई प्रेस कांफे्रंस से संघ और भाजपा का असली चेहरा उजागर हो गया है।