समय को दर्ज़ करती प्रतिभा कटियार की लेखनी, पढ़िये उनकी एक महत्वपूर्ण कविता

भोपाल

प्रतिभा कटियार, शिक्षण और पत्रकारिता से जुड़ा जाना पहचाना नाम है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के साथ जुड़ी प्रतिभा शिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूण काम कर रहीं हैं और देहरादून में रहती हैं। लेकिन इससे इतर भी इनकी एक खास पहचान है। ये बेहद सुंदर कविताएं, कहानियां और आलेख लिखती हैं। इनकी कविता-कहानियों में देश दुनिया के अलग अलग मुद्दे शामिल होते हैं। प्रेम, प्रकृति, स्त्री विमर्श से लेकर सामाजिक विद्रूपताओं और सियासी हालात पर भी इनकी कलम खूब चलती है। प्रतिभा कटियार रूस की महान कवयित्री मारीना त्स्वेतायेवा पर बहुचर्चित किताब “मारीना” की लेखिका भी हैं। तो आईये आज पढ़ते हैं वर्तमान स्थितियों का सच बयां करती इनकी एक मर्मस्पर्शी कविता-

प्रतिभा कटियार की कविता

समय के पाँव की बिवाईयां
रिसने लगी हैं इन दिनों
इन बिवाइयों से बह रही है भूख
बीमारी, असुरक्षा, भय

इन बिवाइयों से आवाज आती है
बच्चों के रोने की
स्त्रियों के सुबकने की
पुलिस की लाठी ठीक से पड़े पीठ पर
इसलिए सही ढंग से मुर्गा बनते
और दर्द को चुपचाप पी लेने की आवाज

मवाद पड गया है समय के पाँव में
रक्त के साथ साथ वह भी बह रहा है
दर्द नहीं होता अब, वो बस रिसता रहता है

प्लास्टिक की बोतलें पाँव में बंधकर
चप्पल हो गयी हैं
सूटकेस बन गया है बच्चे को ढोने की गाडी
कंधे जुते हुए हैं बैलगाड़ी के साथ
शुक्र मनाते हुए कि कम से कम
सांस बची है अब तक

समय के पाँव लड़खड़ा रहे हैं
वो अपने चेहरे पर पोत दी गयी
खूनी कालिख क्या धो पायेगा कभी

कैसे मिटा पायेगा कोई
समय के दामन पर लगे दाग
कि एक ऐसा वक़्त था इतिहास में
जब जिन्दा घायल इन्सानों ने
सफर किया था लाशों के ढेर के साथ

बच्चे इतिहास में पढेंगे कि
एक तरफ लोगों ने हौसला बढाने को
बजाई थी थालियाँ
जलाये थे दिए
और उन्हीं लोगों ने नौकरी से,
घर से निकाल दिया था लोगों को
वो मजदूर थे, उन्हें मजलूम बनाया गया
वो स्वाभिमानी थे
उन्हें हाथ फैलाने को मजबूर किया गया

बच्चे पूछेंगे इतिहास की कक्षाओं में
जिन लोगों ने बनायी थीं सड़कें
उन्हें उन सडको पर चलने का हक क्यों नहीं था
जो रेल की पटरियां उन्होंने ही बिछाई थीं
उन्ही पटरियों पर उन्हें जान क्यों देनी पड़ी
जो अनाज उगाया उन्होंने खेतों में
उसी को तरसते हुए भूख से क्यों मर गए लोग

ये दुनिया जिन्होंने बनायी थी
उस दुनिया में उनके लिए ही जगह क्यों नहीं थी
बच्चे पूछेंगे और शिक्षक सोचेंगे
क्या लिखेंगे बच्चे अपनी कॉपियों में कि
उन्हें दिए जा सकें पूरे नम्बर

एक बच्चा कोरा पन्ना छोडकर चला जाएगा
समय की आँख का आंसू उस पन्ने को भिगो देगा…