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भोपाल| लोकसभा चुनाव में पिछले परिणाम को दोहराने को लेकर भाजपा ने कमर कस ली है| लेकिन इस बार भाजपा के सामने अपने ही चुनौती बने हुए हैं| विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी बागियों ने परेशानी खड़ी कर दी है| टिकट वितरण के बाद से ही प्रदेश की 7 सीटों पर सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिल रहा है, जहां डैमेज कण्ट्रोल भी फेल रहा| अब इन गढ़ वाले क्षेत्रों में भाजपा के समीकरण बिगड़ते दिख रहे हैं, भितरघात की पूरी संभावना है| वहीं कांग्रेस में भी यही स्तिथि बनी है, लेकिन कम सीटों पर यह हालात हैं| 

भाजपा में करीब एक दर्जन तो कांग्रेस में 6 सीटों पर प्रत्याशियों के खिलाफ विरोध हो रहा है| सबसे ज्यादा विरोध खजुराहो में देखने को मिल रहा है। यहां भाजपा प्रत्याशी वीडी शर्मा के विरोध में कटनी के पूर्व विधायक राजू पोद्दार इस्तीफा दे चुके हैं। संजय नगाइच, पूर्व विधायक विजय बहादुर सिंह बुंदेला सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये सभी निर्दलीय नामांकन भरने की तैयारी में हैं। यहां स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा जटिल हो गया है। वहीं सागर में राजबहादुर सिंह को प्रत्याशी बनाने का विरोध हो रहा है। बुधवार को उनका नाम घोषित होने के बाद शाम को कुछ लोगों ने पुतले के साथ जुलूस निकाला। इसमें शामिल लोगों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह और राजबहादुर सिंह के खिलाफ नारेबाजी की।

इन सीटों पर भाजपा के लिए अपने ही चुनौती 

विरोध की लहर सीधी, शहडोल, बालाघाट और टीकमगढ़ से शुरू हुई और यह आग धीरे धीर अन्य सीटों पर भी फेल गई| सीधी में रीति पाठक का विरोध है। पूर्व सांसद गोविंद मिश्रा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पहले सिंगरौली के जिला अध्यक्ष ने भी इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उन्हें जैसे-तैसे मना लिया गया। इसके अलावा भी कई नेता सीधी के विरोध में है|  शहडोल में ज्ञान सिंह पार्टी प्रत्याशी हिमाद्री सिंह के विरोध में हैं। उपचुनाव में सिंह के सामने हिमाद्री कांग्रेस के टिकट पर लड़ कर हारी थीं। उन्होंने हाल में भाजपा ज्वाइन की और सिंह का टिकट काटकर उन्हें दे दिया गया। इससे सिंह आहत हैं। उनके पुत्र व विधायक शिव नारायण सिंह भी हिमाद्री के पक्ष में नहीं दिखे हैं। इसके अलावा बालाघाट में भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई है| यहां से वर्तमान सांसद बोध सिंह भगत बागी हो गए हैं। भगत का टिकट काटकर ढाल सिंह बिसेन को दिया गया है। टीकमगढ़ में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र खटीक के विरोध में पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने इस्तीफा दे दिया और अब सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।  मंदसौर में सुधीर गुप्ता का भी विरोध सामने आ चूका है| इसके अलावा मुरैना, धार, विदिशा, भिंड में भी विरोध हो चूका है|  

कांग्रेस में 6 सीटों पर विरोध 

कांग्रेस में सबसे ज्यादा विरोध भिंड में देखने का मिल रहा है। यहां कांग्रेस ने देवाशीष जरारिया को टिकट दिया है। पुराने नेता उनके खिलाफ हैं। बताया जा रहा है कि भिंड लोकसभा से कांग्रेस के पांच विधायकों में से भी अधिकतर प्रत्याशी चयन से खुश नहीं हैं और एक बैठक का बायकॉट कर चुके हैं। धार में दिनेश गिरवाल का विरोध हो रहा है। पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी यहां से सशक्त दावेदार थे। आखिरी समय तक उनका नाम टिकट की दौड़ में था। अब वे कांग्रेस प्रत्याशी के लिए परेशानी का सबब बने हैं। ग्वालियर में अशोक सिंह, हाेशंगाबाद में शैलेंद्र दीवान का भी कुछ नेता विरोध कर रहे हैं। सतना में टिकट नहीं मिलने से विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिंह में नाराजगी है। पीथमपुर, महूगांव और मनावर में बुधवार को कांग्रेस प्रत्याशी गिरवाल का विरोध करते हुए पुतला जलाया गया।