MP: इन कमजोर सीटों पर संघ का मंथन, BJP को मजबूत करने बनाई रणनीति

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भोपाल। लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए कमजोर मानी जाने वाली सीटों को लेकर संघ की मध्यप्रांत की बैठक बुधवार को हुई। जिसमें भोपाल सहित विदिशा, होशंगाबाद, राजगढ़ एवं बैतूल को लेकर चर्चा की गई।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संघ की मध्यप्रांत की बैठक में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख अरुण कुमार क्षेत्र प्रचारक दीपक ब्रहस्पुते ने बैठक में भोपाल सहित विदिशा, होशंगाबाद, राजगढ़ एवं बैतूल के अलावा इंदौर सीट को लेकर चर्चा की बैठक में संघ के सभी अनुशांगिक संगठन के प्रभारी भी मौजूद थे। बैठक में लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी और उनकी छवि और चुनाव जीतने की क्षमता का आंकलन किया गया। साथ ही हालही में मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां आयकर विभाग की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। बैठक में संघ द्वारा कमजोर सीट पर खुलकर भाजपा के पक्ष में काम करने की बात भी हुई।

बड़े नेता भी मिले

संघ की बैठक के बाद भाजपा के कई दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एवं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने संघ के नेताओं से चर्चा की और लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किल सीटों के बारे में जानकारी दी।

यह भी खुलासा किया गया कि देश भर में चुनाव प्रचार के दौरान `राष्ट्रवाद ‘मुख्य मुद्दा होगा। संघ परिवार किसानों की दुर्दशा, समाज में संयुक्त परिवार की अवधारणा को पुनर्जीवित करने और सार्वजनिक कनेक्ट ड्राइव के दौरान युवाओं और महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा। “राष्ट्रवाद का मुद्दा प्रमुख फोकस है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ कैडर ने कहा, संघ परिवार बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार देने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जो राष्ट्रीय अखंडता और देश की सुरक्षा के लिए बोलते हैं।

आरएसएस ने हाल ही में अपने 100 प्रचारकों और फ्रंटल समूहों के सदस्यों की मदद से चुनावों पर अपना सर्वेक्षण और प्रतिक्रिया पूरी की, जिसमें बजरंग दल, स्वदेशी जागरण मंच, किसान संघ, वन विकास परिषद और सेवा भारती ने भाजपा और भारतीय जनता के साथ विवरण साझा किया। युवा मोर्चा (भाजयुमो) प्रमुख चुनाव क्षेत्रों में प्रचारकों को जुटाने के लिए। प्रचारक पिछले दस महीनों से देश भर का दौरा कर रहे हैं। प्रचारकों ने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जनता का समर्थन हासिल कर रही है, जिसने मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार, रोजगार और कृषि ऋण माफी सहित लगभग सभी प्रमुख मुद्दों को दरकिनार कर दिया है।