लोक सेवा केंद्रों के टेंडर में हो रही गड़बड़ी, अपनों को लाभ पहुंचाने नियमों में संशोधन!

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भोपाल। इन दिनों पूरे प्रदेश में लोक सेवा केन्द्रों के लिये निविदा का कार्य किया जा रहा है। इन निविदाओं के लिये सर्वप्रथम जारी शर्तो को बार बार बदला जा रहा है। सबसे पहले यह निविदा 1 मार्च को जारी की गई थी और 3 अप्रेल इसकी अंतिम तिथि थी लेकिन चुनावो का हवाला देकर इनके लिये आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि बड़ा कर 25 मई दोपहर तीन बजे तक कर दी गई । इसके बाद निविदा जमा करने की अंतिम तिथि को 25 को दोपहर दो बजे अचानक से बड़ा कर 30 मई तक कर दिया गया। इसमें निविदा जमा करने की तिथि भी बड़ा दी गई थी।

इन निविदाओं को भी व्यक्ति, फर्म, कंपनी डाल सकते थे और प्रत्येक निविदा के साथ एक लाख रुपये की सिक्यूरिटी मनी का डिमांड ड्राफ्ट अनिवार्य था। इसके बाद निविदा जमा करने की अंतिम तिथि तीसरी बार बड़ा कर 4 जून कर दी गई और इसके साथ लघु उद्योग के पंजीयन वाले एमएसएमई पंजीयन धारियों को एक लाख रुपये का डीडी लगाने से राहत देते हुऐ लोक सेवा अभिकरण ने बिना एक लाख का डीडी लगाये निविदा जमा करने की अनुमति दे दी गई । इसके अलावा सबसे पहले निविदा जमा करने के लिये जो शर्ते लगाई गई उन्हे भी बार बार शिथिल किया गया और जो पत्र या डाक्यूमेंट अनिवार्य थे उन्हे हटा दिया गया और एक पत्र में जारी निर्देशों को अगले पत्र में पलट दिया गया ।

सूत्रों के मुताबिक कुछ विशेष फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिये एमएसएमई के पंजीयन और कुछ कागजात जैसे केंद्रों पर काम करने वाले आपरेटर  के बायोडेटा जो पहले लगाना अनिवार्य थे उन्हे बाद में हटा दिया गया। इसके अलावा अभिकरण जो भी संशोधन पत्र जारी कर रहा था उन्हे भी निविदाकार को निविदा क��� साथ लगाना अनिवार्य था पर बाद में उन्हे भी संशोधित कर उनमें छूट दे दी गई। कई जिलों सीहोर, ग्वालियर और अन्य जिलों में लोक सेवा केन्द्र संचालक का लाटरी के माध्यम से चयन करने के बाद आज शुक्रवार को भी लोक सेवा अभिकरण ने पत्र जारी कर नियमों में संशोधन किया है और साफ माना जा रहा है कि कुछ विशेष फर्म और कंपनी को लाभ पहंचाने के लिये बार बार संशोधन किये जा रहे है। लोक सेवा अभिकरण ने 23 मार्च 2019 को एक पत्र जारी कर  नेट वर्थ सर्टिफिकेट ओर निविदा में किये गये संशोधन पत्र को संलग्न करना अनिवार्य किया था पर इसके बाद 28 मई को फिर से एक पत्र जारी कर इस नियम को बदल दिया गया । इसके अलावा शुक्रवार 7 जून को लोक सेवा अभिकरण ने एक पत्र जारी कर निविदा के साथ लगाये जाने वाले डीडी जो नियमों के मुताबिक संबंधित जिला मुख्यालय पर पेयबिल होना चाहिये उसमें संशोधन कर विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है । क्योंकि सूत्रों से पता चला है कि भोपाल के एक समूह ने मिलकर पूरे प्रदेश में निविदा डाली है और उनके द्वारा लगाए गये डीडी मुंबई की फेडरल बैंक से बनावाये जाकर मुंबई की ब्रांच में ही पेयबिल हैं और इनके निरस्त होने की संभावना है । इसी विशेष समूह को लाभ पहुंचाने के लिये आज अभिकरण ने पत्र जारी किया है । 

पूरे  प्रदेश में चार सो से अधिक लोक सेवा केन्द्र है जिनकी निविदा तीन वर्षो के लिये की जा रही है । एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में 25 हज़ार निविदा जमा की गई हैं और प्रत्येक केन्द्र के लिये एक लाख रुपये का डीडी बिड सि्क्यूरिटी और एक हज़ार रुपये का डीडी निविदा फार्म के लिये लगवाया गया है । निविदा की मुख्य शर्तों में निविदाकार के पास एक केन्द्र के लिय दस लाख रुपये की नेटवर्थ सर्टिफिकेट या बीस लाख रुपये का सोलवेंसी प्रमाण पत्र अनिवार्य है । एक एक जिले में चार सो से पांच सो निविदा जमा हुई है । कई निविदाकार  लोक सेवा अभिकरण के बार बार निर्णयों के खिलाफ न्यायालय में भी जाने की बात कह रहे है ।