वरिष्ठ पत्रकार नवीन पुरोहित ने बताया सूरत अग्निकांड के लिए आखिर कौन जिम्मेदार..

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भोपाल।

गुजरात के सूरत में शुक्रवार को  एक ‘कोचिंग क्लास’ में आग लगने के मामले में सबको दहला के रख दिया। इस हादसे में टीचर समेत 20  बच्चों की मौत हो गई। वही 20  घायल हो गए।इस दर्दनाक घचना के बाद देशभर से लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और डिजिआना मीडिया ग्रुप के ग्रुप चैनल हेड नवीन पुरोहित ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर बिल्डर, कोचिंग संचालक और स्थानीय शासन-प्रशासन जिम्मेदार ठहराया है।

वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि निश्चित रूप से इस हादसे के लिए जिम्मेदार, बिल्डर, कोचिंग संचालक और स्थानीय शासन-प्रशासन है, लेकिन ये कोचिंग का कुकुरमुत्ता बाजार क्यों उगा है, एक नजर इस परिदृश्य पर भी डालिये शायद दिमाग के जाले कुछ हद तक साफ हो जाएं। अब हमारी सोसायटियों में घर नहीं है, ज्यादातर रिटायरिंग होम है। न उन घरों में मामा-नानी, दीदी, बुआ के घर आने-जाने का सिलसिला है, और न ही अन्य रिश्तेदारों के यहाँ आने जाने और बुलाने की प्यार भरी मनुहार। अब तो सब कुछ सिस्टेमैटिक है, यंत्रवत है, मजाल जो एक चम्मच इधर का उधर हो जाये। सब वैल डेकोरेटेड वैल मैनेज्ड, यही तो बोलते है न हम!

याद कीजिये कि गर्मी की छुटियाँ कब पंख लगाकर, पतंगबाजी और अन्य खेलों में उड़ जाती थी! किताबें पैक करके बस्तों में बंद करके कुछ महीनों के लिए भुला ही दी जाती थी! पढनेबालों के लिए किताब कॉमिक्स हो जाती थी। दिन भर की धमाचौकड़ी,कैरम, लूडो, ब्यापार, साँपसीढ़ी, क्रिकेट और कुछ स्थानीय खेलों में सुबह से शाम तक का समय कम पड़ता था। दोस्तों की मंडलियों में प्रेम, साझेदारी, सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मानवीय गुण कब पनप जाते थे, पता ही नहीं चलता था। घर पर परिवार और रिश्तेदारों के बीच गजब का सामंजस्य, उनका मान सम्मान, सहयोग सौहार्द, इनकी देखादेखी, स्वतः ही बड़ों का अनुसरण होने लगता था।

लेकिन अब तो बच्चा स्कूल से फ्री हुआ, तो आर्ट क्लास, समर कैम्प, फ़लाना ढिकाना न जाने क्या क्या जबरन सिखाने के कितने चोचले पैदा कर दिए! बिना ये जाने समझे कि जो उसको सिखाया पढ़ाया जा रहा है उसमें बच्चे की रुचि है भी या नहीं। बच्चा घर पर अपने दाद-दादी, नाना-नानी के साथ कुछ न सीखे, माता पिता से कुछ न सीखे, पास पड़ोस से कुछ न सीखे, नैसर्गिक विकास न हो पाए बस झोंक दो कुकुरमुत्ते की तरह उगी चौतरफा कोचिंग क्लासों में ताकि अपनी जिम्मेदारियों से बचा जा सके। मत होने दीजिये उसके मानवीय गुणों का नैसर्गिक विकास, मत समझाइए उसे मानवीय मूल्य, मत दीजिये उसे अपना और अपनों के बीच का अमूल्य समय। चिंता मत करिए ये आपसे, अपनों से, समाज से ज्यादातर समय कुछ न कुछ सीखने में रत, दूर रहे ये बच्चे इतना तो सीख ही जायेंगे कि आपको ओल्ड एज होम कब भेजना है।

गाजरघास की तरह बेशर्मी से फैले शैक्षणिक संस्थानों के संचालकों को यह बेहतर मालूम है कि अपना खुद का मनोविज्ञान, और संस्कृति भूले हुए इस देश को आकर्षित करने में कुछ चकाचौंध भरे डिस्पले बोर्ड, बैनर पोस्टर, और होर्डिंग पर्याप्त है, क्योंकि वे जानते है कि इस देश के अभिभावकगण अपने बच्चों को कुछ भी करके कुछ न कुछ सिखाने की मानसिक बीमारी से पीड़ित है। क्या सिखाना है, क्यों सिखाना है, कहां सिखाना है, कब सिखाना है इन सबसे दूर बस सिखाना है इस जिद ने गाजरघासी कोचिंग का आकर्षक बाजार खड़ा कर दिया है। और हां शायद इसी बजह से, शिक्षा का एक भी विश्वस्तरीय संस्थान नहीं है इस देश में! उस देश में जो आज से हजारों वर्षों पूर्व नालंदा और तक्षशिला के नाम से विख्यात था और अब तक्षशिला के नाम से कुख्यात है। इन बच्चों की बलि हमारी सिखाने की अंधी जिद ने भी ली है।

गौरतलब है कि शुक्रवार देऱ शाम डायमंड सिटी के नाम से मशहूर सूरत के सरथना इलाके में एक व्‍यवसायिक इमारत के तीसरे मंजिल पर चल रहे कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी जिसमें के करीब 20 स्‍टूडेंट्स की मौत हो गई । विनाशकारी आग से बचने के लिए करीब एक दर्जन स्‍टूडेंट इमारत के तीसरे और चौथे फ्लोर से कूद गए। जिसमें करीब 20  लोग घायल हो गए।हादसे के बाद से पूरे सूरत में मातम नजर आ रहा है वहीं मामले की जांच जारी है। घटना के बाद खबर है कि पुलिस ने अब तक कोचिंग संचालक को गिरफ्तार किया है वहीं तीन लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। वहीं शहर में हर तरह की कोचिंग क्लासेस के संचालन पर फिलहाल रोक लगी दी गई है। क्लासेस अब तभी शुरू होंगी जब उनमें फायर सेफ्टी की व्यवस्था होगी।

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