भोपाल।

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh के मंत्रिमंडल विस्तार (cabinet expension) में ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) प्रदेश की राजनीति में एक धूमकेतु की तरह उभरे हैं। दरअसल तमाम अटकलें लगाई जा रही थी कि बीजेपी (bjp) में आने के बाद सिंधिया की उपेक्षा हो रही है और उनका यह निर्णय उनकी राजनीति के हिसाब से कोई बहुत बेहतर निर्णय नहीं है। लेकिन गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार में साफ तौर पर दिखा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नए सितारे के रूप में उभर रहे हैं और केंद्रीय नेतृत्व को भी शिवराज की टक्कर का एक बड़ा नेता बीजेपी में और मिल गया है ।

मंत्रिमंडल के गठन को देखें तो कुल 33 मंत्रियों में से 12 यानी एक तिहाई से भी ज्यादा ग्वालियर चंबल संभाग से हैं। बीजेपी के कई विधायक छठी सातवीं बार चुनाव जीतने के बाद भी मंत्री नहीं बन पाए जबकि सिंधिया ने अपने समर्थक सुरेश धाकड़, ओ पी एस भदौरिया और गिर्राज दंडोतिया जैसे लोगो को पहली बार की विधायकी में ही मंत्री पद की शपथ दिला दी। कुल मंत्रिमंडल की संख्या में अगर देखा जाए तो 11 मंत्री ऐसे हैं जो सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं।

सिंधिया के विरोधी यह भी तर्क दे रहे थे कि कान्ग्रेस छोङ भाजपा मे आकर सिंधिया ने राज्यसभा की सीट और केंद्रीय मंत्री के आश्वासन के ऊपर अपने समर्थकों को बलिदान कर दिया ।लेकिन सिंधिया ने यह बता दिया कि वह जो कहते हैं वह पूरा करके भी दिखाते हैं और दरअसल मंत्रिमंडल का विस्तार इतने दिन चलता रहा उसके पीछे सिंधिया की अपने समर्थकों को सम्मानजनक रूप से मध्य प्रदेश की राजनीति में स्थापित करने की कवायद ही महत्वपूर्ण रही। मंत्रिमंडल की शपथ के बाद सिंधिया ने कहा कि टाइगर अभी जिंदा है और मध्य प्रदेश में विकास के लिए अब तक जो कुछ नहीं कर पाए वह करेंगे। हालाकि सिंधिया के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव हैं जिनमे से 21 पर पिछली बार कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ सिंधिया के ग्लैमर के चलते ही जीती थी। अब यह ग्लैमर कितना प्रभावी होगा यह भविष्य बताएगा।