सीएम शिवराज सिंह चौहान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। एमपी में BJP सरकार (BJP Government) के एक साल पूरा होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) का बड़ा बयान सामने आया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन सहयोग से विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे। नर्मदा नदी (Narbada River) को क्षिप्रा नदी और गंभीर नदी से जोड़ने के बाद अब कालीसिंध और पार्वती से जोड़ रहे हैं। जो पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था उसे रोककर सिंचाई की समुचित व्यवस्था की गई। पेयजल के प्रबंध भी किए गए।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज विश्व जल दिवस (world Water Day) पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi)  के समक्ष हुए त्रि-पक्षीय समझौते से केन और बेतवा(Ken Betwa Link Project) को जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल हुई है। इससे मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के बुंदेलखंड अंचल (Bundelkhand Zone) की तकदीर और तस्वीर बदल जाएगी। इस अंचल के 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बेहतर सिंचाई होगी। यही नहीं करीब 41 लाख लोगों को पर्याप्त पेयजल भी मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन (MP Tourism) संभावनाओं का दोहन किया जाएगा। इसके फलस्वरूप भारत ही नहीं विश्व के देशों के सैलानी मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों पर आयेंगें। बफर में सफर और नाईट सफारी की शुरूआत की गई है। इससे पर्यटन बढ़ेगा जिससे युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार (employment) देने का लक्ष्य पूरा होगा।जब वर्ष 2003 के आखिरी महीने में मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और सुश्री उमा भारती (Uma Bharti) के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी, उसके पहले हमें बदहाल मध्यप्रदेश मिला था।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के समय कोरोना का संक्रमण सर्वाधिक था।  स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मैंने इस संकल्प के साथ शपथ ली थी कि ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता और मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ, गीत नया गाता हूँ।’ मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के संबल, उनके प्रेम और आशीर्वाद और जन सहयोग के कारण कठिन परिस्थितियों में भी चुनौती का सामना किया जा सका। अभी भी जो कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आई है, वह निश्चित ही समाप्त होगी। अंधेरा छँटेगा, सूरज निकलेगा, यह रैन अंधेरी बीतेगी, पतवार चलाते जाएंगे, मंजिल आएगी, आएगी।