प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शिवराज का भी नाम, पार्टी ने सौंपी यह जिम्मेदारी

भोपाल| मध्य प्रदेश भाजपा में मंडल और जिला अध्यक्षों के बाद अब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के निर्वाचन की तैयारियां शुरू हो गई हैं।  एक सप्ताह के भीतर भाजपा अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पार्टी नेताओं की बड़ी बैठक हो सकती है।  उम्मीद है कि प्रदेश अध्यक्ष के लिए रायशुमारी अगले हफ्ते हो। इस बीच भाजपा ने विभिन्न राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनावों के लिए केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों के नाम तय कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें उत्तराखंड का प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वहीं मध्य प्रदेश के लिए मुख्तार अब्बास नकवी और अश्विनी चौबे को पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है।

मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए शिवराज भी दौड़ में शामिल हैं| बताया जा रहा है उनका नाम भी तेजी से चल रहा है, वहीं मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह उनका सीमित कार्यकाल माना जा रहा है। राकेश सिंह को विधानसभा चुनाव से पहले ही नंदकुमार सिंह चौहान की जगह प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। तब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे। बीजेपी की पार्टी लाइन के मुताबिक आमतौर पर जो प्रदेश अध्यक्ष नॉमिनेटेड होता है उसे निर्वाचन का मौका मिलता है, इस लिहाज से देखें तो राकेश सिंह का दावा मजबूत है. लेकिन जिस तरह अंदरखाने संगठन पर सवाल उठे और बीजेपी को प्रदेश की सत्ता से बाहर होना पड़ा, उसे देखते हुए क्या केंद्रीय आलाकमान प्रदेश बीजेपी के सेनापति के नाम पर कोई बड़ा बदलाव करेगा ये देखने वाली बात होगी| 

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह का नाम भी सामने आ रहा है, उनका नाम पूर्व सीएम शिवराज ने ही आगे बढ़ाया है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के पद को देखते हुए जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश कर रही है। इसलिए नेता प्रतिपक्ष के पद पर गोपाल भार्गव को बैठाने के बाद पार्टी ने ब्राम्हणों को साधने का काम किया था। अब पार्टी अन्य वर्गोंं को साधने के लिए किसी गैर ब्राम्हण नेता को मौका दे सकती है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी इस दौड़ में शामिल होना बताया जा रहा है , लेकिन उन्होंने इससे इंकार करते हुए कहा कि वो किसी दौड़ में शामिल नहीं है|