शिवराज की खुली चेतावनी…..किसान की आंखों में आंसू आए तो ईंट से ईंट बजा दूंगा

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भोपाल।

मध्यप्रदेश में किसान खून के आंसू रो रहा है, कोई पूछने वाला नहीं है। लेकिन मैं किसानों के साथ खड़ा हूं। किसान के हक की लड़ाई लड़ूंगा, हक दिलवाऊंगा। मुझे कहते हुए गर्व है कि किसान का जितने का ओला-पाला से नुकसान होता था, उससे कहीं ज्यादा की मैं भरपाई कर देता था। आज किसान का कोई आंसू पोंछने वाला नहीं है।26 फरवरी को सीहोर में प्रदर्शन करेंगे। किसान की आंखों में आंसू नहीं आने दूंगा। जनता को परेशान नहीं होने दूंगा। जरूरत पड़ी तो ईंट से ईंट बजा दूंगा । यह बात शुक्रवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंडीदीप में आयोजित विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र के भाजपा बूथ लेवल कार्यकर्ता सम्मेलन को सं‍बोधित करते हुए कही। 

               शिवराज यही नही रुके उन्होंने कहा कि  मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए किसी जरूरतमंद को खाली हाथ नहीं लौटने दिया। जब तक सांस चलेगी, लड़ता रहूंगा। गरीबों, मजदूरों, किसानों को न्याय दिलाऊंगा  किसान कर्ज माफी के लिए 56 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है और  कमलनाथ सरकार ने 6 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। ऐसे में कैसे कर्ज माफ होगा। जो वादा किया, वह निभाना पड़ेगा, नहीं निभाया, तो हम निभवायेंगे  ।। शिवराज ने कहा कि जब खेतों में ओले गिरते थे, तो मुझे लगता था कि वो खेतों में नहीं, बल्कि मेरी छाती पर गिर रहे हैं। सुबह होते ही मेरा हेलिकॉप्टर खेतों में और मैं व मेरे मंत्री पीड़ित किसानों के पास पहुंच जाते थे। मैं ओले-पाले के लिए हजारों करोड़ रुपये किसानों को बांट देता था।मध्यप्रदेश में किसान खून के आंसू रो रहा है, कोई पूछने वाला नहीं है। मुझे कहते हुए गर्व है कि किसान का जितने का ओला-पाला से नुकसान होता था, उससे कहीं ज्यादा की मैं भरपाई कर देता था। आज किसान का कोई आंसू पोंछने वाला नहीं है।लेकिन मैं किसानों के साथ खड़ा हूं। किसान के हक की लड़ाई लड़ूंगा, हक दिलवाऊंगा।

कांग्रेस हमेशा लेती है यू टर्न 

नई सरकार आई तो कहा कि वंदे मातरम बंद, मैंने कह दिया कि सरकार को चलने नहीं दूंगा, तो कांग्रेस ने कहा कि मैंने बंद करने के लिए थोड़े ही कहा था, इसे ढोल नगाड़े के साथ शुरू करने के लिए कहा था। ऐसे कांग्रेस यू टर्न लेती है। प्रदेश में कांग्रेस की ढाई सीएम की सरकार चल रही है, इसमें एक सीएम है, एक सुपर सीएम है और एक सुपर-सुपर सीएम है। सरकार के हालात ऐसे हो गए हैं कि एक अधिकारी कर्मचारी का ट्रांसफर करता है, तो दूसरा उसे निरस्त करा रहा है।