Shivraj's-150-schemes-may-be-closed

भोपाल।

इन दिनों प्रदेश की कमलनाथ सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही है। विकास कार्यों पर ब्रेक और वादों का अंबार लगा हुआ है। ऐसे में फंड जुटाने के लिए सरकार ने शिवराज सरकार की 150  से ज्यादा योजनाओं को बंद करने का फैसला लिया है। सरकार ने बजट का हवाला देकर पिछली सरकार की कई योजनाओं को बंद करने की तैयारियां शुरू कर दी है। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने भी इसकी पुष्टि की है। सरकार के इस फैसले से ना सिर्फ फिजूल खर्ची पर रोक लगेगी बल्कि करोडों रुपए की बचत भी होगी, जिनका विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

दरअसल,   प्रदेश में कई ऐसी योजनाएं है जो सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर चल रही है। जो बरसों से विभागवार बजट पुस्तिका में तो हैं, लेकिन इसमें या तो एक रुपए टोकन के रूप में प्रावधान किया जा रहा है या बजट राशि ही खर्च नहीं की गई। इससे जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, ऐसे में सरकार ने फैसला किया है कि इन योजनाओं को बंद किया जाएगा, जिन्हें बंद नहीं किया जा सकता उन्हें अन्य योजना में मर्ज कर फिर से नए स्वरुप में लाया जाएगा, ताकी जनता को इसका पूरा लाभ मिल सके। इस पर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि छोटे बजट के नाम पर चल रही 150 योजनाएं बंद की जाएगी । 62 विभाग की करीब 120 करोड़ की योजनाएं बंद करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि कुछ योजनाओं को दूसरी योजनाओं में भी मर्ज करने की तैयारी चल रही है।

 इन योजनाओं पर लग सकता है ब्रेक

2015-16 में शिवराज सरकार के समय शुरू हुई स्वागतम् लक्ष्मी स्कीम और राज्य की बेटी बचाओ योजना शामिल हैं। जिन्हें केंद्र सरकार की बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ में मर्ज किया जाएगा। साथ ही आदिवासी महिलाओं के लिए बनी पन्नाधाय विशेष पोषण योजना और आंगनबाड़ी में इनके बच्चों को ड्रेस देने के लिए तीन साल पहले चलाई गई टंट्याभील यूनिफाॅर्म स्कीम आदि भी शामिल है। जिन्हें सरकार बंद करने की तैयारी में है। इसके अलावा उन योजनाओं को बंद किया जाएगा जो अलग अलग नाम से चल रही है लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है।खास करके इन योजनाओं में वे भी शामिल है जो चुनाव के समय जनता को लुभाने के लिए की गई थी और इसमें पिछली सरकार द्वारा बजट के नाम पर टोकन मनी का इस्तेमाल किया जाता रहा है।