खबर का असर: नई व्यवस्था तक पुराने स्थान पर होगी स्लाटरिंग

भोपाल। एनजीटी के आदेश के बाद शहर में बंद हुए स्लाटर हाउस और इससे होने वाली मांसाहार के चाहतमंदों की परेशानियों के देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रियायती आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के मुताबिक नगर निगम द्वारा नए स्थान पर स्लाटर हाउस के निर्माण होने तक पुराने स्थान पर स्लाटरिंग जारी रहेगी। इस मामले को लेकर पिछले दिनों विस्तृत समाचार प्रकाशित किया था।

सूत्रों के मुताबिक राजधानी के स्लाटर हाउस पर की गई तालाबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के अनुसार किसी भी धर्म, जाति, समुदाय अथवा निवासियों के खानपान से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय शासन-प्रशासन को जिम्मेदार बताया गया है। इस लिहाज से किसी भी शहर के मांसाहारी लोगों के लिए मांस की व्यवस्था करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी में शामिल किया गया है। ऐसे में राजधानी में करीब एक माह से बंद पड़े स्लाटर हाउस को पुन: शुरू कर पूर्ववत काम जारी रखने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही एनजीटी द्वारा दिए गए गए निर्देश के मुताबिक स्लाटर हाउस नए स्थान पर निर्मित करने के लिए कहा गया है। एनजीटी के आदेश के मुताबिक शहर के बीच स्थित स्लाटर हाउस को स्थानांतरित कर नए स्थान पर माडर्न स्लाटर हाउस बनाने के लिए निर्देशित किया गया है।

यह बनने लगे थे हालात

शहर की करीब 3-4 लाख की मांसाहारी जनता के लिए मांस की व्यवस्था के लिए हर दिन हजारों क्विंटल मांस का उत्पादन निर्बाध रूप से जारी था। जबकि इस स्लाटरिंग को मंत्री से लेकर निगम कमिश्रर तक अवैध बता रहे थे। बावजूद इसके इस अवैध कार्य को लेकर किसी दिशा से कोई कार्यवाही भी नहीं की जा रही थी। अवैध रूप से किए जा रहे स्लाटरिंग को लेकर जहां जानवरों की बिना जांच-परख कटाई हो रही थी। बीमार, बूढ़े और मरणासन्न अवस्था के जानवरों का मांस भी इस दौरान लोगों को परोसा जा रहा था। दूसरी तरफ चोरी-छिपे हो रही स्लाटरिंग को लेकर अवैध वसूली का दौर भी तेज हो गया था। इस बीच आमजन की परेशानी अवैध मांस खाने और इसके लिए ज्यादा कीमत चुकाने के हालात भी बन गए थे।

क्यों बनी स्थिति

शहर के बीच स्थित स्लाटर हाउस को शहर के पर्यावरण के लिए नुकसानदायक और शाकाहारी जनता की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया गया था। इस मामले को लेकर एनजीटी ने स्लाटर हाउस अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। लंबे समय से चल रही प्रक्रिया के दौरान नगर निगम नए स्लाटर हाउस के लिए स्थान तय नहीं कर पाया, जिसके चलते एनजीटी ने करीब एक माह पहले स्लाटर हाउस पर तालाबंदी के आदेश दे दिए थे।

क्यों हो रही समस्या

एनजीटी के निर्देश के बाद नगर निगम ने आदमपुर छावनी के अलावा कुछ स्थानों पर नया आधुनिक स्लाटर हाउस बनाने की तैयारी की थी। लेकिन सियासी दखल के चलते हर स्थान पर विरोध के स्वर उठते रहे और निगम अदालत के आदेश के पालन में नया स्लाटर हाउस तैयार नहीं कर पाया। कई बार समय-सीमा का पालन न कर पाने के चलते एनजीटी ने निगम पर जुर्माना भी आयद कर दिया है।