…तो इसलिए सिंधिया-दिग्विजय में से किसी एक को मिलेगी राज्यसभा में एंट्री

भोपाल।

मार्च के अंतिम सप्ताह में होने जा रहे राज्यसभा (rajyasabha) चुनावों को लेकर मध्यप्रदेश (madhyapradesh) में दिलचस्प स्थिति बन सकती है दरअसल यह तीनों सीटें सत्यनारायण जटिया (satyanarayan jatiya) और प्रभात झा (prabhat jha) भाजपा (bjp) और दिग्विजय सिंह (digvijay singh) कांग्रेस (congress) का कार्यकाल (term) पूरा होने के कारण खाली हो रही है। संख्या बल के चलते इस बार कांग्रेस को उम्मीद है कि उसे दो सीटें मिलेंगी। इन दोनों सीटों के लिए प्रमुखता से दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) का नाम लिया जा रहा है। लेकिन इस बीच कांग्रेस को इस विधानसभा चुनाव में भरपूर समर्थन देकर वोट दिलाने वाले आदिवासी संगठन जयेस और कई आदिवासी संगठनों की ओर से यह मांग शुरू हो गई है कि किसी आदिवासी को यह टिकट दिया जाए।

दरअसल आजादी के बाद से ही कांग्रेस आदिवासी (trible) वोटों पर दावा करती रही है और इस बार विधानसभा चुनावों में भी आदिवासी अंचलों में उसे आशातीत सफलता मिली है। इसके चलते इस बात की प्रबल संभावना है कि राज्यसभा की दो सीटों में से किसी एक सीट पर आदिवासी चेहरे को मौका दिया जाए ।हालांकि इस बात की उम्मीद कम है कि वर्तमान किसी विधायक को कांग्रेस राज्यसभा भेजेगी क्योंकि इससे एक बार फिर चुनाव कराना पड़ेगा और उपचुनाव में जीतना कोई जरूरी नहीं।

आदिवासी चेहरों में सबसे प्रमुख नाम इस समय अजय शाह मकड़ाई (ajay shah makdai) का है जिन्होंने कांग्रेस के लिए पिछले काफी समय से मशक्कत की है। इसके साथ-साथ आदिवासी संगठन जयेस और अन्य पिछड़ा वर्ग आदिवासियों की लड़ाई लड़ने वाले डॉक्टर आनंद राय (dr.aanand rai) को भी टिकट देने की मांग कर रहे हैं ।उनका मानना है कि डॉ आनंद राय ने एक विसलब्लोअर के रूप में बीजेपी सरकार की असफलताओं को जिस तरह से उजागर किया उससे कांग्रेस को 15 साल बाद सत्ता वापसी करने में सफलता मिली ।अब यदि किसी एक आदिवासी को टिकट दिया जाता है तो जाहिर सी बात है कि फिर दिग्विजय या सिंधिया दोनों में से किसी एक का चुनाव आलाकमान के लिए मुश्किल भरा काम होगा।