तो क्या अंधेरे में डूब जाएगा पूरा मध्य प्रदेश !

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। ऐन त्यौहार के मौके पर मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहरा गया है, दरअसल मध्य प्रदेश में कोयले की कमी के चलते कई बिजली इकाइयों में उत्पादन रोक दिया गया है। फिलहाल इन इकाइयों में कुल क्षमता से करीब आधी ही बिजली पैदा हो रही है। बकाया राशि के भुगतान में देरी के चलते बिजली संयंत्रों को कोल इंडिया से रोजाना एक-दो रैक कोयला ही मिल पा रहा है। इससे त्यौहारों के दौरान बिजली सप्लाय में कमी का खतरा पैदा हो गया है।

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कोयले के देशव्यापी संकट का असर मध्यप्रदेश में भी दिखने लगा है। प्रदेश में महज 592 हजार टन कोयला बचा है। खरगोन में कोयला पूरी तरह समाप्त हो चुका है। गाडरवाड़ा में भी महज एक दिन का कोयला बचा है। वही मध्यप्रदेश जनरेशन कंपनी के सबसे बड़े श्री सिंगाजी थर्मल पावर में दो दिन का कोयला बचा है। प्रदेश में बिजली की डिमांड 10 हजार मेगावॉट तक पहुंच रही है। इसकी तुलना में प्रदेश में थर्मल, जल, सोलर व विंड से महज 3900 मेगावॉट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। शेष बिजली सेंट्रल पावर से ली जा रही है।

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मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी के मुताबिक कंपनी के थर्मल प्लांट को रोज 52 हजार टन कोयले की जरूरत पड़ती है। वहीं, निजी थर्मल पावर के लिए 25 हजार टन और सेंट्रल थर्मल पावर प्लांट के लिए 111 हजार टन कोयले की जरूरत रोज पड़ती है। अब वही अमरकण्टक थर्मल प्लांट क्षमता 210 मेगावाट में महज 07 दिन का कोयला बचा है जबकि 15 दिन स्टॉक होना चाहिए वही, संजय गांधी थर्मल प्लांट क्षमता 1340 मेगावाट में भी कोयले का 07 दिन का स्टॉक बचा है जबकि 20 दिन का स्टॉक होना चाहिए, वही सतपुड़ा में क्षमता 1330 मेगावाट में 05 दिन का स्टॉक बचा है जबकि 20 दिन का स्टॉक होना चाहिए, इसके साथ ही श्री सिंगाजी में क्षमता 2520 मेगावाट 02 दिन का स्टॉक बचा है जबकि 25 दिन का स्टॉक होना चाहिए, अनूपपुर थर्मल प्लांट में क्षमता 1200 मेगावाट में भी महज 03 दिन का स्टॉक बचा है जबकि 20 दिन का स्टॉक होना चाहिए, वही बीना में क्षमता 500 मेगावाट में 08 दिन का स्टॉक बचा है जबकि यहां भी 25 दिन का स्टॉक होना चाहिए, इसके साथ ही खरगौन में क्षमता 1320 मेगावाट स्टॉक खत्म हो चुका है। जबकि 25 दिन का स्टॉक होना चाहिए, गाडरवारा क्षमता 1600 मेगावाट में 01 दिन का कोयला का स्टॉक बचा है जबकि 20 दिन का स्टॉक होना चाहिए, वही विंध्याचल में क्षमता 4760 मेगावाट में 03 दिन का स्टॉक बचा है जबकि यहां भी 15 दिन का स्टॉक होना चाहिए।

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चीन के बाद अब भारत में भी इस वक्त बिजली संकट पैदा हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है, कोयले की कमी। कोयले से चलने वाले देश के कुल 135 पावर प्लांट्स में से आधे से ज्यादा के पास महज 2-4 दिनों का ही कोल स्टॉक बचा है। भारत जैसे देश में जहां 70 प्रतिशत बिजली का उत्पादन कोयले से होता हो, वहां इस संकट के चलते इस आशंका से इंकार नही किया जा सकता कि अब बिजली बंद हो सकती है। वह भी ऐसे वक्त में जब फेस्टिवल सीजन शुरू है, जब बिजली की डिमांड बढ़ जाती है। औद्योगिक और घरेलू बिजली खपत दोनों पीक लेवल पर होते हैं।

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बिजली संकट पर कांग्रेस ने भी निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश में कोयले का भारी संकट बना हुआ है, जिससे बिजली का उत्पादन लगातार घट रहा है। बिजली संयंत्रों की कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं। प्रदेश गहरे बिजली संकट की और बढ़ रहा है। उन्होंने सोशल पोस्ट कर कहा है कि लोग परेशान हैं और सरकार चुनाव में व्यस्त है।

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