जिलाध्यक्षों को लेकर शुरू हुई जोर आजमाइश, दिग्गजों में खींचतान!

भोपाल। मप्र भाजपा में संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। जिसके तहत 30 नवंबर को सभी संगठना जिलों में अध्यक्षों का फैसला होगा।खास बात यह है कि जिलाध्यक्षों के चुनाव में भी बड़े नेताओं का ज्यादा दखल नहीं होगा। प्रदेश नेतृत्व की कोशिश है कि सभी जिलों में एक ही दिन में फैसला हो जाएगा। चुनाव से पहले कुछ जिलों में विवाद के हालात बनने की खबर प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची है। इसके लिए संगठन ने समाधान निकाल लिया है। जहां बड़े नेता अपने-अपने समर्थकों के लिए अड़ेंगे, वहां सहमति से किसी अन्य नाम पर भी फैसला हो सकता है। 

जिलाध्यक्षों के लिए भी उम्र की सीमा तय की गई है। जिसके तहत 50 साल तक के नेता को जिलाध्यक्ष चुना जाएगा। पिछले हफ्ते मंडल अध्यक्षों के चुनाव में भी 40 साल की आयु सीमा को सख्ती से लागू किया गया था। हालांकि कुछ जिलों में आयु को लेकर विवाद की स्थिति बनी। जिसकी वजह से मंडल अध्यक्षों का फैसला होने में ज्यादा वक्त लग गया। लेकिन जिलाध्यक्ष को लेकर प्रदेश नेतृत्व ने अभी से पारदर्शिता बरतना शुरू कर दी है। जिन जिलों में विवाद की स्थिति बन रही है, वहां पार्टी ने रायशुमारी कराने के लिए पर्यवेक्षक और निर्वाचन अधिकारियों को चुनाव से दो दिन पहले जाकर वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं।


बड़े शहरों में खींचतान ज्यादा

जिलाध्यक्ष को लेकर इंदौर,भोपाल,ग्वालियर और जबलपुर में ज्यादा खींचतान है। क्योंकि प्रदेश भाजपा के ज्यादातर नेता इन्हीं जिलों से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में हर नेता की कोशिश रहेगी कि नया जिलाध्यक्ष उसका समर्थक हो। इसके लिए गोटियां फिट की जा रही है। राजधानी भोपाल में वर्तमान जिलाध्यक्ष विकास वीरानी को भी बदला जाना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में वीरानी का विकल्प कौन बनेगा, इसे लेकर खींचतान चल रही है। हालांकि पार्टी सूत्र कहते हैं कि यहां पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सहमति के बिना जिलाध्यक्ष फाइनल नहीं होगा। फिलहाल जो नाम चर्चा में हैं उनमें महापौर आलोक शर्मा भी जिलाध्यक्ष के लिए दावेदारी कर रहे हैं। वे पहले भी जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, शिवराज के करीबी माने जाते हैं। इसके अलावा पार्टी यदि किसी विधायक को जिले की कमान सौंपती है तो विश्वास सारंग और कृष्णा गौर को प्रबल दावेदार माना जा रहा है।