सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले से पहले स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का बड़ा बयान

भोपाल/जबलपुर।

सुप्रीम कोर्ट आज शनिवार को अयोध्या विवाद  पर अपना फैसला सुनाएगा। संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर पांच जजों की पीठ ने 16 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुबह साढ़े दस बजे फैसला सुनाएगी। इसके पहले श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के संस्थापक और SC में पक्षकार  स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का बडा बयान सामने आया है।  

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कुछ सियासी लोग झगड़ा करवा सकते हैं। ये वहीं लोग होते हैं जो ध्रुवीकरण से राजनीतिक लाभ लेने की सोचते हैं। मैं हिन्दुओं से अपील करता हूं कि राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट कुछ भी फैसले ले आप शांति से स्वीकार करें।शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वे किसी धर्म के विरोधी नहीं हैं परंतु जिन धर्मों के व्यक्तियों को जहां स्थान मिला है वह वहां जाकर अपने भगवान की आराधना करें। रामजन्म भूमि हिंदुओं की है इसलिए अयोध्या में राममंदिर बनना चाहिए।

वही उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण का हकदार रामालय ट्रस्ट है और रामालय ट्रस्ट में शामिल संतों के माध्यम से ही राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।  शंकराचार्य ने मांग रखी कि राम मंदिर का निर्माण गर्भ गृह में हो जिसे सनातनधर्मी आचार्य ही बनाएं।वही उन्होंने कहा कि अयोध्या में गर्भ गृह से राममंदिर का निर्माण होगा और अयोध्या में धनुर्धर राम नहीं माता बल्कि कौशल्या की गोद में बैठे रामलला नजर आएंगे और इसी तर्ज पर मंदिर का निर्माण कार्य कराया जाएगा।