मिशन 2019 : मप्र के इन धुरंधरों पर भाजपा-कांग्रेस की उम्मीदों का दारोमदार

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भोपाल। मध्यप्रदेश लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 21  और कांग्रेस ने 22  सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए है। वर्तमान में बीजेपी के पास 26  तो कांग्रेस के 3 सीटे है।एमपी में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है और  अब वो लोकसभा चुनाव में विन 29  का लक्ष्य लेकर चल रही है।इसके लिए कांग्रेस ने कई नए चेहरों को मैदान में उतारा तो उन दिग्गजों को भी वापस मौका दिया है जो पिछला चुनाव जीतते जीतते हार गए।  वही दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर हुई बीजेपी लोकसभा चुनाव में अपनी सीटे बचानी में जुटी हुई है। 26  सीटों पर फिर से दबदबा बना पाना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि जीत के लिए बीजेपी ने कई वर्तमान सांसदों का टिकट काटा है और नए उम्मीदवारों को मौका दिया है, वही सालों से जीत का परचम लहराने वाले दिग्गजों को फिर मैदान में उतारा है।

इसमें खास बात तो ये है कि इस बार कांग्रेस ने सात उन दिग्गजों को मैदान में उतारा हैं जो हारी बाजी जीतने की आस पैदा करते हैं। वहीं भाजपा ने सात उन दिग्गजों को मैदान में उताराहैं जिनका सालों से राजनीति में सिक्का चल रहा है। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के लोकप्रिय और जनाधार वाले नेता माने जाते हैं। कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि इस बार उनके खाते में 20  से ज्यादा सीटे आएगी।इस बार केवल कांग्रेस-बीजेपी ही नही बल्कि इन दिग्गजों की भी साख दांव पर लगी हुई है। अगर एक भी मौका छूटता है कि इनका राजनैतिक करियर खत्म हो सकता है, वही जीते तो पार्टी और संगठन में इनका कद और पद बढ़ना तय है।

कांग्रेस के ये दिग्गज उम्मीदवार

दिग्विजय सिंह : भोपाल से उम्मीदवार दिग्विजय सिंह दस साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनको कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस का सबसे लोकप्रिय नेता माना जाता है। कांग्रेस पिछले तीस सालों से भोपाल में जीत को तरस रही है। जीत का सूखा खत्म करने के लिए ही दिग्विजय को भोपाल से उतारा है। 

विवेक तन्खा : जबलपुर से उम्मीदवार विवेक तन्खा राज्यसभा से सदस्य हैं। अभी उनका कार्यकाल दो साल से ज्यादा बाकी है लेकिन कांग्रेस को यहां भी जीत की दरकार है। इस सीट पर कांग्रेस का वनवास खत्म करने के लिए पार्टी के पास तन्खा से बड़ा कोई विकल्प नहीं था। ना ना करते आखिर तन्खा को सहमति देनी ही पड़ी।

अजय सिंह : अजय सिंह भले ही चुरहट से विधानसभा चुनाव हार गए हों लेकिन आज भी विंध्य में वे कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा हैं। विंध्य की राजनीति पर मजबूत पकड़ के कारण ही कांग्रेस ने उनको सीधी से उम्मीदवार बनाया है। अजय सिंह ही सीधी पर कांग्रेस की टेढ़ी चाल को सीधा कर सकते हैं। 

 कांतिलाल भूरिया : रतलाम में भले ही २०१४ में कांतिलाल भूरिया को झटका लगा हो लेकिन उसको उन्होंने सुधार भी लिया। भूरिया कांग्रेस के सबसे बड़े आदिवासी नेता माने जाते हैं। भूरिया के अलावा कांग्रेस रतलाम सीट पर किसी और पर भरोसा नहीं कर सकती। 

नकुलनाथ : छिंदवाड़ा से पहला चुनाव लड़ रहे नकुलनाथ की गिनती भी कांग्रेस के दिग्गजों में की जा रही है। दरअसल ये सीट उनके पिता कमलनाथ की है जो अब मुख्यमंत्री बन चुके हैं। कमलनाथ इस सीट से ९ बार सांसद रहे हैं। ये सीट उनकी प्रतिष्ठा का सवाल है। 

रामनिवास रावत : मुरैना से उम्मीदवार रामनिवास रावत विजयपुर से विधानसभा के पांच चुनाव जीत चुके हैं हालांकि इस बार उनको हार मिली है। मुरैना में भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर को कांग्रेस की ओर से रावत ही टक्कर देने में सक्षम हैं। 

अरुण यादव : पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री अरुण यादव का गृह क्षेत्र खंडवा है। वे यहां से सांसद रह चुके हैं। उनके पिता सुभाष यादव का इस क्षेत्र में बड़ा नाम रहा है, भाई सचिन प्रदेश में कृषि मंत्री है। 

ये बीजेपी के दिग्गज उम्मीदवार

राकेश सिंह : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह लगातार तीन बार से जबलपुर से सांसद हैं। उनके वर्चस्व को तोडऩा कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 

नरेंद्र सिंह तोमर : पिछली बार ग्वालियरसे चुनाव जीते केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इस बार मुरैना से उम्मीदवार हैं। तोमर का लंबा चुनावी अनुभव है, वे प्रदेश में मंत्री भी रहे हैं और दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहते सरकार भी बनाई है। तोमर राज्यसभा से भी सांसद रह चुके हैं। 

वीरेंद्र खटीक : टीकमगढ़ से केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक को भाजपा ने जीत के भरोसे पर ही फिर से मौका दिया है। खटीक बुंदेलखंड के बड़े नेता माने जाते हैं। वे लगातार इस सीट से जीत रहे हैं। 

नंदकुमार सिंह चौहान : खंडवा से उम्मीदवार नंदकुमार सिंह चौहान पांच बार यहां से सांसद रह चुके हैं। राकेश सिंह से पहले वे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रहे हैं। 

प्रहलाद पटेल : दमोह से भाजपा ने एक बार फिर प्रहलाद पटेल को उतारा है। प्रहलाद पटेल भाजपा के बड़े लोधी नेता माने जाते हैं, उन्हें इस वर्ग में पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती का विकल्प भी माना जाता है। 

फग्गन सिंह कुलस्ते : मंडला उम्मीदवार फग्गन सिंह कुलस्ते भाजपा का सबसे बड़ा आदिवासी चेहरा हैं। वे मंडला से लगातार जीतते रहे हैँ। वे केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। कमजोर परफॉर्मेंस के बाद भी पार्टी को अपने इस पत्ते पर ही भरोसा है। 

गणेश सिंह : सतना से लगातार तीन बार के सांसद गणेश सिंह को चुनौती देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के अजय सिंह को शिकस्त दी थी। एक बार फिर पार्टी को उनसे जीत की उम्मीद है।