आयोग के नोटिस का असर, दो मृत बंदियों के परिजनों को मिले पांच-पांच लाख रूपये, पुलिसकर्मियों की वेतनवृद्धि रुकी

Bhopal Death Compensation Of Prisoners : मप्र मानव अधिकार आयोग की अनुशंसा पर पुलिस अभिरक्षा में रखे गये बंदियों की मौत हो जाने के कारण मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रू. दे दिये गये हैं। मामला इंदौर एवं छतरपुर जिले का है।

यह था मामला 
आयोग के प्रकरण क्रमांक 9811/इंदौर/2017 के अनुसार पुलिस अधीक्षक इंदौर ने पुलिस थाना कनाडिया में मृत्यु के संदेही आरोपी बंदी सन्नी उर्फ डोबा पिता रमेश अलावा की हवालात के शौचालय में फांसी लगा लेने पर उपचार के दौरान मयूर अस्पताल, इन्दौर में 28 दिसम्बर 2017 को मृत्यु हो जाने की सूचना दी थी। सतत् सुनवाई उपरांत इस प्रकरण में आयोग ने राज्य शासन को तीन अनुशंसायें की थीं। अनुशंसाओं में आयोग ने कहा था कि मृतक सन्नी उर्फ डोबा पिता रमेश बलाई, निवासी शांति नगर, थाना आजाद नगर, जिला इंदौर की अभिरक्षा में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई असामयिक मृत्यु के कारण उसे प्रदत्त वैधानिक एवं मानव अधिकारों का घोर हनन हुआ, अतः मृतक के वैध वारिसों को पांच लाख रूपये क्षतिपूर्ति राशि दी जाये। बंदी सन्नी को अवैध रूप से अभिरक्षा में रखने और उसके पश्चात् नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही न करने के लिये दोषी अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध विभागीय जांच एक माह में की जाये। थाना कनाडिया के अपराध क्र. 309/2019 धारा 304 भादवि का अनुसंधान कम से कम उप पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के पर्यवेक्षक में राजपत्रित अधिकारी द्वारा कराया जाये। आयोग की इन अनुशंसाओं के पालन में पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा प्रतिवेदन दिया गया है कि आयोग के प्रथम अनुशंसा के परिपालन में मृतक बंदी सन्नी उर्फ डोबा के पिता रमेश अलावा को पांच लाख रूपये क्षतिपूर्ति राशि दे दी गई है। द्वितीय अनुशंसा के पालन में संयुक्त लंबित विभागीय जांच क्र. 02/2020 में दोषी निरीक्षक मांगीलाल चैहान, सहायक उप निरीक्षक सुनील रैकवार, सहायक उप-निरीक्षक नितिन भालेराव, सहायक उप निरीक्षक विष्णु चैहान, प्रधान आरक्षक सुरेश सोलंकी एवं आरक्षक पारस की एक-एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक दी गई है। इस दीर्घशास्ति का प्रभाव दोषियों की भविष्य की वेतनवृद्धियों, पेंशन आदि पर भी पडे़गा। तृतीय अनुशंसा के पालन में पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा संबंधितों को दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

बंदी की मौत का दूसरा मामला 
इसी प्रकार आयोग के प्रकरण क्रमांक 5820/छतरपुर/2019 के अनुसार पुलिस अधीक्षक छतरपुर ने पुलिस थाना भगवां द्वारा गिरफ्तार किये गये बंदी वीरन उर्फ वीरेन्द्र पिता प्रेमलाल लोधी द्वारा मेडिकल परिक्षण हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बड़ामलेहरा भेजे जाने पर शौचालय (बाथरूम) में गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने से मृत्यु हो जाने की सूचना दी थी। सतत् सुनवाई उपरांत इस प्रकरण में आयोग ने राज्य शासन को अनुशंसा की थी कि मृतक की पुलिस अभिरक्षा में आत्महत्या कर लेने के कारण उसके वैधानिक एवं मानव अधिकारों का घोर हनन हुआ, अतः मृतक के वैध वारिसों को पांच लाख रूपये क्षतिपूर्ति राशि दी जाये। आयोग की इस अनुशंसा के पालन में पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा प्रतिवेदन दिया गया है मृतक बंदी वीरन उर्फ वीरेन्द्र पिता प्रेमलाल लोधी की धर्मपत्नी श्रीमती रचना लोधी को पांच लाख रूपये क्षतिपूर्ति राशि दे दी गई है।