‘भीलवाड़ा मॉडल’ अपनाकर कोरोना क्राइसिस से निपटेगी प्रदेश सरकार!

भोपाल

राजस्थान का भीलवाड़ा जिला कोरोना संक्रमण से निपटने के मामले में देश के सामने एक नज़ीर बन गया है। मार्च के तीसरे और चौथे सप्ताह में भीलवाड़ा में जब एक साथ 24 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए तो ऐसा लगा कि जैसे भीलवाड़ा देश का कोरोना जोन बन गया हो या फिर भारत का इटली बन गया।  लेकिन जिस तरह से राजस्थान सरकार खासकर जिला प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया, घर-घर स्क्रीनिंग कराई, जिले का बॉर्डर पूरी तरह सील कर दिया और फिर कर्फ्यू लगाया, उसने यहां कोरोना को रोकने के प्रभावी भूमिका निभाई। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी कोरोना को लेकर भीलवाड़ा की योजनाबद्ध कार्यप्रणाली की प्रशंसा की है, साथ ही भोपाल और इंदौर की सीमाओं को पूरी तरह सील करने का फैसला लिया गया है। इसी के साथ भीलवाड़ा में अपनाए गए कई उपाय मध्यप्रदेश में भी लागू करने की तैयारी है।

चाहे राजनेता हो या फिर सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी, यहां सभी को कर्फ्यू पास जारी करने से इन्कार कर कम्युनिटी ट्रांसमिशन रोका गया। उसी का नतीजा है कि आज भीलवाड़ा जिला कोरोना संक्रमण रोकने के मामले में देश का “रोल मॉडल” बन गया है।

भीलवाड़ा में मार्च के अंतिम सप्ताह में अचानक बिगड़े हालात से एक बार तो राज्य सरकार और जिला प्रशासन भी सकते में आ गया था, लेकिन डॉक्टरों ने दिन-रात एक कर कोरोना के आंकड़ों को 27 पर ही रोक दिया। अब जिले में मात्र तीन लोग कोरोना पॉजिटिव बचे हैं, जिनके स्वास्थ्य में भी लगातार सुधार हो रहा है। अगर हालात में सुधार की यही रफ्तार रही तो अगले चार-पांच दिन में भीलवाड़ा देश का पहला कोरोना नेगेटिव जिला बन सकता है। पिछले पांच दिन से यहां एक भी कोरोना पॉजिटिव अथवा खांसी-जुकाम का मरीज नहीं मिला है और ये वहां की सरकार, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, डाक्टरों के साथ स्थानीय लोगों की सहभागिता से ही संभव हुआ है। मध्यप्रदेश में जिस तरह लगातार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए लगता है कि अगर यहां भी भीलवाड़ मॉडल अपनाया जाए, तो समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।