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भोपाल। मध्य प्रदेश में लगातार राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहे हैं। बीजेपी ने एक अगस्त को प्रदेश भर के पदाधिकारी और विधायकों की बैठक बुलाई थी। कहा जा रहा था बागी विधायकों को भी इस बैठक में बुलाया गया है। केंद्रीय नेतृत्व सभी बीजेपी विधायकों से वन टू वन चर्चा करेंगे। लेकिन बैठक नाकाम साबित हुई। 

बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि बैठक में विधायकों को सदस्यता अभियान में शामिल होने के बारे में सवाल उठाए गए थे। बैठक में भाजपा जिला प्रमुख, राज्य और मंडल के पदाधिकारी और मोर्चा के सदस्य शामिल हुए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में से कुछ के कांग्रेस के संपर्क में होने की अफवाह भी है। इनमें संजय पाठक, दिनेश राय मुनमुन, सुदेश राय, प्रहलाद लोधी और सीताराम आदिवासी का नाम सियासी गलियारों में ज़ोंरो पर है। हालांकि, वे सभी कह चुके हैं कि वे भाजपा के साथ हैं और उनकी कांग्रेस में जाने की कोई योजना नहीं है। सीताराम आदिवासी तो मीडिया पर कांग्रेस की ओर से लालच देने का बयान देकर खुलासा कर चुके हैं|  वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष खुलकर कह चुके हैं कि कांग्रेस उनके विधायकों को प्रलोभन देकर संपर्क कर रही है, लेकिन उनके विधायक चट्टान की तरह साथ खड़े हैं| दूसरी ओर रहरहकर अलग अलग मंत्री ओर कांग्रेस नेता लगातार विधायकों के संपर्क में होने के दावे कर रहे हैं| इस बैठक में भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा, राजश्री सिंह, लीना जैन, मनीषा सिंह और पूर्व मंत्री रामपाल सिंह और पारस जैन ने भी भाग लिया। लेकिन पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और नरोत्तम मिश्रा नहीं थे।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मीडियाकर्मियों को यह बताने की कोशिश की कि विधायक “बैठक में शामिल होने के रास्ते पर थे”, लेकिन इस तरह से यह नहीं हुआ। भाजपा नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों के साथ एक चर्चा की कोशिश कर रहा है, यहां तक कि कांग्रेस का दावा है कि छह से अधिक भाजपा विधायक अभी भी संपर्क में हैं। भाजपा नेतृत्व अभी भी त्रिपाठी और कोल के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर अड़ा हुआ है।