इस बार विधानसभा में नहीं दिखेंगे यह भाजपा विधायक, जानें क्या है वजह

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भोपाल। पंद्रहवीं विधानसभा में इस बार किसी भी दल की सरकार चुनकर आए, लेकिन कुछ ऐसे वर्तमान विधायक हैं। जिनके चेहरे अब देखने को नहीं मिलेंगे। यह वह सदस्य हैं जो बेहद पुराने और कई बार लगातार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचते रहे हैं। इनमें प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा नाम है पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर। वह लगातार 10 बार विधायक चुने गए। दूसरा नाम है कैलाश विजयवर्गीय, सांची से विधायक रहे गौरीशंकर शेजवार और मंत्री कुसुम मेहदेले जैसे पुराने चेहरे इस बार सदन में मौजूद नहीं रहेंगे। 

दरअसल, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर कई अहम पदों पर रहें हैं। प्रदेश की राजनीति में उनका सिक्का चलता है। चाहें पार्टी संगठन हो या फिर संघ दोनों ही जगह उनकी पड़क है। हालांकि, कुछ दिनों से वह भाजपा में साइडलाइन कर दिए गए। उन्हें दो साल पहले गृह मंत्री पद से हटाए जाने के बाद इस बार भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट भी नहीं दिया था। उनके स्थान पर उनकी बहू कृष्णा गौर भोपाल की गोविंदपुरा सीट से चुनाव मैदान में उतरीं हैं।

वहीं, दूसरा सबसे चर्चित नाम हैं इंदौर की महू विधानसभा से वर्तमान विधायक और पार्टी के महासचिव भी हैं। उन्हें जनता लगातार 1990 से विधायक चुकर विधानसभा भेजती आ रही है। लेकिन इस बार उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेते हुए अपने बेटे को इंदौर तीन विधानसभा से मैदान में उतारा है। नके बेटे आकाश विजयवर्गीय को पार्टी ने इंदौर-तीन विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया।

प्रदेश विधानसभा में अपनी व्यंग्यात्मक शैली के लिए चर्चित सांची से विधायक रहे गौरीशंकर शेजवार की भी इस बार विधानसभा में मौजूदगी नहीं रहेगी। शेजवार के स्थान पर भी उनके बेटे मुदित शेजवार को टिकट दिया गया है। सात बार के विधायक शेजवार को वर्ष 2013 में वन मंत्री बनाया गया था। अपनी बेबाकी के लिए चर्चित प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री कुसुम मेहदेले का नाम भी इस सूची में शामिल है। वे 1990, 1998, 2003 में जनप्रतिनिधि निर्वाचित होने के बाद 2013 में एक बार फिर विधायक चुनी गईं थीं। पार्टी ने 2018 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया है।