सरकार के इस निर्णय से कर्मचारियों को होगा यह बड़ा नुकसान

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भोपाल।
मध्य प्रदेश (madhya pradesh) की सरकार (government) ने कर्मचारियों (employe) के लिए एक नया निर्णय लिया है। इसके तहत अब उनकी परिवीक्षा अवधि यानी प्रोबेशन (probetion) पीरियड दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। यानी अब नई नौकरी वाला कर्मचारी तभी स्थाई हो पाएगा जब वह तीन साल का पीरियड पूरा करके संतोषजनक परिणाम दिखा पाएगा। यहां तक तो ठीक है लेकिन सरकार ने एक निर्णय लिया है जो पहले कभी नहीं रहा।

इसके तहत सरकार तीन साल तक कर्मचारियों को वेतन देने के बजाय स्टाय फंड देगी जो पहले वर्ष 70 फ़ीसदी, दूसरे वर्ष 80 फ़ीसदी और तीसरे वर्ष 90 फ़ीसदी रहेगा यानी पहले कर्मचारी को सेवा में आने के बाद पहले ही महीने से जो वेतन मिलने लगता था वह भी तीन साल बाद मिलेगा। सरकार का यह निर्णय 27 फरवरी से लागू हो गया है और इसे द्वितीय तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए लागू किया गया है।मध्यप्रदेश के सरकारी-अधिकारी कर्मचारियों में इस निर्णय को लेकर काफी रोष है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय किसी भी रूप में कर्मचारी हितैषी नहीं है और इसे जल्द से जल्द वापस लिया जाना चाहिए।

आयोग की भर्तियों में लागू नही होगा नियम
नई भर्ती पर प्रोबेशन पीरियड दो साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। पहले यह दो साल हुआ करती थी, अब यह तीन साल होगी। इस दौरान मिलने वाला स्टायपेंड भी एक-एक साल करके बढ़ाया जाएगा। वित्त विभाग ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया। मप्र लोक सेवा आयोग की भर्तियों में यह नियम लागू नहीं होगा। आयोग के मामले में प्रोबेशन पीरियड दो साल ही रहेगा और वेतनमान न्यूनतम रहेगा। राज्य सरकार का यह फैसला द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर लागू होगा। इस दौरान अन्य भत्ते सरकारी कर्मचारी की तरह मिलते रहेंगे। यहां बता दें कि पूर्व में कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग ने अब इसका नोटिफिकेशन जारी किया।