सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 4.5 लाख पेंशनर्स को मिलेगी बड़ी राहत

This-decision-of-the-government-will-provide-relief-to-4-5-lakh-pensioners-of-the-mp-

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के साढ़े चार लाख से ज्यादा पेंशनर्स के लिए बड़ा फैसला किया है| सरकार पेंशनर्स की महंगाई राहत (डीआर) बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ की सहमति लेने की अनिवार्यता को ख़त्म जा रही है| पिछले दिनों मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट यह फैसला लिया गया है| जिसको अब अमल में लाने की तैयारी की जा रही है| वित्त विभाग अब मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 में संशोधन का परीक्षण करके छत्तीसगढ़ सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर सहमति बनाएगा। 

दरअसल, राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के नियम 45 (49) के तहत जब तक दोनों राज्यों यानि मप्र व छत्तीसगढ़ की सहमति नहीं होती है। तब तक दोनों ही राज्यों के पेंशनरों के आर्थिक मुद्दे विलंबित रहते थे, चाहे वो महंगाई भत्ता राहत हो या सातवें वेतनमान के एरियर से संबंधित हो।  सरकार ने कैबिनेट की बैठक में 3 प्रतिशत महंगाई राहत 1 जनवरी 2019 से लागू कर प्रदेश के करीब 7 लाख कर्मचारियों व 4.5 लाख पेंशनरों को राहत देते हुए राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 45 (49) को समाप्त करने का निर्णय लेकर भी लिया है, जिससे प्रदेश के पेंशनरों को सौगात मिली है। रिटायर्ड व पेंशनर महासंघ ने प्रदेश सरकार का आभार माना है। इस प्रावधान के समाप्त होने से जब प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ेगा, उसके साथ ही पेंशनर्स का डीआर भी बढ़ा दिया जाएगा।

हर बार अटकता है पेंशनर का डीआर

पेंशनर्स का वेतनमान लागू करने या डीआर बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ की सहमति लेने में समय लगता है। इसके कारण कभी भी पेंशनर्स का डीआर समय पर घोषित नहीं हो पाता। हाल ही में चुनाव के पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने पेंशनर्स का डीआर बढ़ा दिया पर मध्य प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण मामला उलझ गया था। इसके पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है। जिसके चलते लम्बे समय यह सुझाव पेंशनर्स एसोसिएशन सरकार को बता रहा था|  छत्तीसगढ़ की सहमति लेने की अनिवार्यता को समाप्त करने से पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी| 

खर्च का होता है बंटवारा 

बता दें राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 में प्रावधान खर्च को लेकर है जो दोनों राज्यों के बीच बंटता है। वर्ष 2000 के पहले जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उनका डीआर बढ़ाने में आने वाले खर्च का 74 फीसदी हिस्सा मध्य प्रदेश को उठाना पड़ता है। इस राशि को आरक्षित कर रखा जा सकता है। जब छत्तीसगढ़ सरकार पेंशनर्स का डीआर बढ़ाने का फैसला कर ले, तब राज्य सरकार उन्हें राशि मुहैया करा दे। इससे प्रदेश के पेंशनर्स का डीआर बढ़ाने में आने वाली परेशानी समाप्त हो जाएगी।