पहली बार जब मप्र में नहीं दर्ज हुई एक भी चुनावी हिंसा

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भोपाल।

मप्र में चुनाव के दौरान इस बार हैरान करने वाला तथ्य सामने आया। अमूमन देखा गया है कि चुनाव के समय प्रदेश में हिंसक घटनाओँ की शिकायत चुनाव आयोग के पास थोक में आती हैं, लेकिन यह पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव में अब तक हिंसक वारदातों की एक भी एफआईआर द्रर्ज नहीं हुई है। 2014 में हिंसक वारदातों के कुल 22 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन इस चुनाव में यह आकंडा शून्य पर है। यह अपन�� आप में एक रिकॉर्ड है इतना ही नहीं 2014 के मुकाबले इस 2018 के विधानसभा चुनाव में भी हिंसक वारदातों का एक भी मामला सामने नहीं आया था।

अभी तक के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हिसंक वारदातों के मामले मे जरूर दर्ज हो जाते थे….. पर इस बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव मे ऐसा कुछ भी नहीं हुआ ।हालांकि विभिन्न मामलों में 3375 एफआईआर जरूर दर्ज हुई हैं। उक्त सभी मामलों में पुलिस विभिन्न धाराओँ के तहत कार्रवाई कर रही है। चुनाव आयोग की माने तो उनका कहना है कि यह पहली बार है जब हिंसक वारदातों मे बेतहाशा कमी आई है और यह कमी चुनाव आयोग की तरफ से किए गए इंतेजाम, भारी सुरक्षा बल की तैनाती की वजहों से ही समपन्न हो पाई है।

इन मामलों मे दर्ज हुई सार्वाधिक एफआईआर

प्रलोभन देने के मामले- मतदाताओं का वोट देने का प्रलोभन देने के सैकड़ों  मामले सामने आए हैं।इसमें कैश और विभिन्न तर हके सामान देकर वोट के लिए प्रलोभन देने के कुल 268 मामले सामने आए  हैं, जिसमे से 178 पर एफआईआर हुई है। वाहनों के दुरूपयोग की शिकायतें- वाहनों के दुरूपयोग की कुल 57721 शिकायतें हुई है, जिसमें से 35 शिकायतों को छोड़ बाकी सभी शिकायतों में कार्रवाई हुई है।