इन सीटों पर उम्मीदवार तय करने में इसलिए देरी कर रही भाजपा

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भोपाल| लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा अब तक 21 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है| लेकिन घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ लगभग दस सीटों पर विरोध से भाजपा में हड़कंप मच गया है| कुछ सीटों पर तो टिकट कटने से नाराज सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है| जिससे बीजेपी के चुनावी समीकरण बिगड़ गए हैं| शेष आठ सीटों पर अब पार्टी फूंकफूंक कर कदम रख रही है| जिससे किसी प्रकार का विरोध सामने न आये| भाजपा को भितरघात का डर सता रहा है, यही कारण है कि उम्मीदवार तय करने में पूरा समय लिया जा रहा है| 

वहीं पार्टी हाईकमान प्रदेश में दिग्गज नेताओं की बगावत से नाराज है और प्रदेश नेतृत्व पर नाराजगी जाहिर की है|  आधा दर्जन सांसदों का विरोध होने के बाद भी टिकट मिला, जिसके कारण स्थानीय नेताओं ने पार्टी के इस फैसले का विरोध किया है| अब जिन नेताओं ने इनके टिकट की सिफारिश की है, शीर्ष नेता प्रदेश के उन नेताओं से खासे नाराज हैं। यही वजह है कि हाईकमान बची हुई सीटों को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। 

भाजपा ने जिन 21 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमें से कई जगह बगावत के हालात हैं। बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत ने पार्टी छोड़ निर्दलीय पर्चा भर दिया है। राजगढ़ में सांसद रोडमल नागर का विरोध हो रहा है। शहडोल में ज्ञानसिंह नाराज हैं। सीधी में रीति पाठक के विरोधी मानने को तैयार नहीं हैं।  इसके अलावा भिंड, मुरैना, टीकमगढ़ समेत कई सीटों पर विरोध सामने आ चुका है| 

आधा दर्जन नेता बने टेंशन 

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के आधा दर्जन से ज्यादा नेता पार्टी की खिलाफत कर चुके हैं। शहडोल सांसद ज्ञान सिंह ने पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। टिकट कटने से ज्ञान सिंह बेहद नाराज हैं और उन्होंने पूर्व में निर्दलीय चुनाव लडऩे की घोषणा कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मनाने पर ज्ञान सिंह ने यह कहकर चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया कि वे उन्हें पास पैसेा नहीं है। जिन लोगों से आर्थिक सहयोग मांगा था, उन्होंने भी मदद से इंकार कर दिया है। इसी तरह छतरपुर के चंदाला से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है। वे टीकमगढ़ से भाजपा के वीरेन्द्र खटीक के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। खास बात यह है कि ज्ञान सिंह और आरडी के बेेटे भाजपा से विधायक हैं। बालाघाट सांसद बोध सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। प्रदेश भाजपा की ओर से बोध सिंह को मनाने की पुरजोर कोशिश की गई, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े हैं। पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी ने भी पत्र लिखकर भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है और टिकट चयन में हो रही देरी को लेकर पार्टी नेतृत्व की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। इसी तरह लोकसभा अध्यक्ष एवं इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन भी खुला पत्र लिखकर पार्टी हाईकमान की टिकट वितरण प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा कर  चुकी हैं। मुरैना महापौर अशोक अर्गल भी भिंड से टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। वे कांगे्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में है। हालांकि कांगे्रस में अर्गल को भिंड से प्रत्याशी बनाए जाने पर सहमति नहीं बन पा रही है। यही वजह है कि अर्गल बैकपुट पर आते दिख रहे हैं।