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भोपाल। विधानसभा चुनाव में नाकाम होने के बाद अब लोकसभा चुनाव में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) अपने उम्मीदवार उतार रही है। इस बार आदिवासी बहुल सीटों पर जयस के तीन उम्मीदवार अपनी किस्तमत आजमा रहे हैं। तीनों प्रत्याशी पेशे से डाक्टर हैं और कांग्रेस-बीजेपी के लिए यह मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। आदिवासी वोट बैंक में इनकी सेंध से समीकरण बिगड़ सकते हैं। 

दरअसल, जयस की स्क्रीनिंग कमेटी 21 अप्रैल को टिकट फाइनल करेगी। तीनों मेडिकोज, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रक्षा बामनिया मुजाल्दे (खरगोन-बड़वानी सीट), डॉ. अभय ओहरी (रतलाम- झाबुआ सीट) और आर्थोपेडिस्ट डॉ. रूपेश पद्माकर (बैतूल सीट) से, आदिवासी संगठन जय आदिवासी के उम्मीदवार बनने के लिए तैयार हैं। आदिवासी समुदाय के नौजवानों द्वारा तैयार किया गया संगठन है। इसका नेतृत्व पूर्व एम्स नई दिल्ली में काम कर चुके डॉ हीरालाल अलावा ने करते हैं। वह हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से धार जिले की मनावर सीट से जीते हैं। उन्होंंने बीजेपी के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री रंजनी बघेल को हराया था। सूत्रों के मुताबिक 2018 के विधानसभा चुनावों में, JAYS ने धार, रतलाम, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ और अलीराजपुर जिलों की लगभग आठ सीटों पर कांग्रेस पार्टी की जीत सुनिश्चित की थी। कांग्रेस को जीत मिलने के पीछे जयस का बड़ा हाथ था। 

जबकि JAYS के संस्थापक और पहली बार विधायक बने डॉ. हीरालाल अलावा को कमलनाथ सरकार में शामिल नहीं किया गया है। जयस ने कांग्रेस से लोकसभा चुनाव में  बैतूल, रतलाम- झाबुआ, धार और खरगोन (छह एसटी सीटों में से चार) पर अपने उम्मीदवार उतारने की मांग की थी। लेकिन कांग्रेस ने इस मांग को नजरअंदाज कर दिया। JAYS ने अब अपने उम्मीदवारों को या तो निर्दलीय के रूप में या क्षेत्रीय पार्टी के बैनर तले मैदान में उतारने का फैसला किया है।