तोमर के ग्वालियर सीट छोड़ने से बिगड़े समीकरण, पार्टी के सामने ये बड़ा संकट

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भोपाल। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुरैना शिफ्ट होने के बाद से ग्वालियर में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। तोमर से मुरैना में स्थानीय कार्यकर्ता काफी नाराज हैं ऐसे में ग्वालियर से उनके समर्थक मुरैना प्रचार करने के लिए जाएंगे। इस तरह पार्टी के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि ग्वालियर में फिर कौन प्रचार से लेकर् बूथ की जिम्मेदारी संभालेगे। इसको लेकर भी भाजपा के अंदर मंथन चल रहा है। वैसे तोमर भी कह चुके हैं कि मुरैना-श्योपुर में हमें मेहनत करना होगी।

तोमर की गिनती भाजपा के बड़े नेताओं में होती है। इसके कारण ग्वालियर में उनके खासे समर्थक हैं जो हर मोर्चे पर तैयार रहते हैं। हाल ही संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा के कुछ हारे प्रत्याशियों ने अपनी हार का ठीकरा बड़े नेताओं पर ही फोड़ा था। जो हारे थे वह एक तरह से तोमर के विरोध में दिखाई देने लगे थे । अब तोमर ग्वालियर की जगह मुरैना से प्रत्याशी हैं । पूर्व सांसद अशोक अर्गल ने तोमर पर निशाना साधते हुए कहा है कि बड़े नेता तो अपने हिसाब से सीट बदल लेते हैं, लेकिन छोटे स्तर के नेताओं को टिकट भी नहीं दिया जाता। अर्गल चार बार मुरैना एवं एक बार भिंड से सांसद रह चुके हैं और उनकी नजदीकियां पूर्व सांसद एवं मुरैना से बसपा प्रत्याशी डॉ. रामलखन सिंह से जगजाहिर है, क्योंकि दोनों ही साथ-साथ चार बार सांसद रहे हैं।

यह समर्थक मुरैना में डालेंगे डेरा

ग्वालियर में केद्रीय मंत्री तोमर के खास समर्थकों में पूर्व साडा अध्यक्ष जय सिंह कुशवाह, राकेश जादौन, अरुण सिंह तोमर, पूर्व जीडीए अध्यक्ष अभय चौधरी, भाजपा अध्यक्ष देवेश शर्मा सहित कई दर्जन ऐसे समर्थकों के नाम हैं जो अपने समर्थकों के साथ अपने नेता के लिए मुरैना रवानगी डालने के लिए तैयार बैठे हैं।

अर्गल को आखिर कितनी बार देते मौका

पूर्व सांसद एवं मुरैना के महापौर अशोक अर्गल इस बात से नाराज हैं कि उन्हें भिंड से टिकट न देकर संध्या राय को क्यों दिया गया। अर्गल की नाराजगी को देखते हुए पूर्व साडा अध्यक्ष राकेश जादौन का कहना था कि क्या अर्गल सिर्फ पद एवं टिकट लेने के लिए ही भाजपा में जमे हुए हैं। पार्टी ने उनके पिता को मौका दिया और उन्हें पांच बार संसद बनवाया फिर भी वह भाजपा के विरोध में बोल रहे हैं तो इससे साबित होता है कि ऐसे नेताओं को अब बर्दाश्त नहीं करना चाहिए, क्योंकि पद की चाहत रखने वाले पार्टी के लिए निष्ठावान नहीं हो सक ते।

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