बीजेपी के लिये मुसीबत का सबब बने दो विधायक

भोपाल। मध्यप्रदेश  (Madhya pradesh) की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। दिग्विजय सिंह (digvijay singh) के हार्स ट्रेडिंग (horse treading) के आरोपो के बाद जहां कई कांग्रेस विधायक (congress mla) सामने आए हैं और इस बात का दावा किया है कि बीजेपी (bjp) ने उन्हें खरीदने की कोशिश की, वहीं बीएसपी विधायक (bsp mla) रामबाई (rambai) के अचानक दिल्ली (Delhi) जाने से इन चर्चाओं को और बल मिला। कांग्रेस (congress) लगातार आरोप लगा रही है कि सरकार (government) को अस्थिर करने के लिये बीजेपी (bjp) लगातार उनके विधायकों (mla) को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है। लेकिन इसी बीच बीजेपी (bjp) खुद मुश्किलों में घिरती नज़र आ रही है। अभी कुछ दिन पहले ही कमलनाथ (kamalnath) और सिंधिया (scindia) के बीच चल रही तनातनी पर चुटकी लेने वाली बीजेपी (bjp) अपने दो विधायकों के कारण खुद मुश्किल में है।

ये विधायक हैं मैहर से नारायण त्रिपाठी (Narayan tripathi) और ब्यौहारी से शरद कोल (sharad kaul)। मंगलवार को रीवा (rewa) और शहडोल (shahdol) संभाग के विधायकों की बैठक में ये दोनों विधायक नदारद रहे। इनकी अनुपस्थिति से सियासी अटकलों में फिर उबाल आ गया है। खास बात ये है कि सोमवार को ही शरद कोल ने अपनी ही पार्टी पर गंभीर आरोप लगाकर एक बार फिर संकेत दे दिया था कि भले ही तकनीकी रूप से वह बीजेपी (bjp) के साथ हैं लेकिन दिल से वो कांग्रेस (congress) के समर्थन में है। शरद कोल ने सोमवार को कमलनाथ सरकार (kamalnath government) की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। कमलनाथ (kamalnath) का आभार जताते हुए कहा कि बिजली बिलों में ग्रामीणों को जो राहत दी है वह अनुकरणीय है ।बीजेपी के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर क्यों ओबीसी (obc) और एससी (sc) एसटी (st) वर्ग के लोगों को संगठन में तवज्जो नहीं मिल रही। शरद कोल ने ये भी कहा कि मैं अकेला इस बात का विरोधी नहीं, अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के कई विधायक और सांसद भी मेरे साथ है।

नारायण त्रिपाठी और शरद कौल, ये दोनों ही विधायक पहले भी अपनी पार्टी के खिलाफ जा चुके हैं। विधानसभा के मानसून सत्र में इन्होने क्रॉस वोटिंग की थी और कांग्रेस (congress) के पाले में जा खड़े हुए थे। और मंगलवाल को फिर विधायकों की बैठक से गायब रहकर एक बार इन्होने अपने बागी तेवर दिख दिए हैं। हालांकि बीजेपी (bjp) अब इस मामले में बचाव करते हुए कह रही है कि दोनों विधायकों ने बैठक में शामिल न होन के लिये पहले से ही अनुमति ले ली थी, लेकिन इन्हीं दो विधायकों के साथ बार बार ऐसा संयोग होना साफ ज़ाहिर कर रहा है कि ये कभी भी बीजेपी (bjp) के लिये मुसीबत का सबब बन सकते हैं।