कैफ भोपाली को भूल जश्न ए उर्दू की तैयारी में अकादमी, पूर्व राज्यपाल ने लिखा सीएम को पत्र

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भोपाल। दुनिया भर में जब अदब और शेरो शायरी की बात होती है तो भोपाल का नाम भी शामिल किया जाता है। उर्दू शायरी में भोपाल के शायरों का ऊंचा किरदार रहा है। जब भी तहज़ीब की बात होती है तो यहां की शायरी और शायरों को जरूर शुमार किया जाता है। देश विदेश में आज भी भोपाल के शायरों के नाम कई महफिलें सजती हैं, उनकी याद में मुशायरे पढ़े जाते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश ही में यहां के शायर बेगाने मालूम पड़ रहे हैं। 20 फरवरी कैफ भोपाली की यौम ए पैदाइश का दिन है। लेकिन मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी उन्हें भूल बैठी है। वहीं, फरवरी के अंतिम हफ्ते में होने वाले जश्न ए उर्दू को लेकर भी अब सोशल मीडिया से उपजा विवाद सीएम तक पहुंच गया है।  उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्यपाल अज़ीज़ कुरैशी ने इस कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए सीएम को एक खत लिखा है।

दरअसल, राजधानी भोपाल में उर्दू अकदमी तीन दिन का एक कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। इसका नाम जश्न ए उर्दू है। जो 26 , 27 और 28 को भोपाल में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर अब विरोध शुरू हो गया है। पूर्व राज्यपाल अज़ीज़ कुरेशी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक पत्र लिखर इस कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि देश में फिलहाल गम का माहौल है, हमारे जवान सरहद पर शहीद हो रहे हैं। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम पर उर्दू अकादमी 40 से 50 लाख तक खर्च करने जा रही है। मेरी गुजारिश है कि इस कार्यक्रम पर रोक लगाई जाए और जो पैसा इस कार्यक्रम पर खर्च किया जा रहा है उसको शहीदों के परिवार को भेजा जाए। उन्होंने कहा है कि मेरे इस पत्र का विरोध वह लोग कर सकते हैं जिनके निजी हित इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। कुरेशी उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन भी रह चुके हैं। 

कैफ को भूली अकादमी

फरवरी के अंतिम हफ्ते में उर्दू अकादमी जश्न ए उर्दू के नाम से एक बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। वहीं, दूसरी ओर भोपाल की शान कहे जाने वाले शायर कैफ भोपाली को भूल गई है। उनकी यौम ए पैदाइश पर अकादमी द्वारा कोई कार्यक्रम आयोजित करना मुनासिब नहीं समझा गया है। इस लेकर सोशल मीडिया पर शहर के कई उर्दू सहाफियों ने मुखालिफत की। उनका कहना है कि अकादमी फाल्तू कार्यक्रमों पर लाखों रुपए खर्च कर रही है लेकिन जो भोपाल के शायर हैं, जिन्होंने उर्दू शायरी को नई पहचान अता की उनको याद भी नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है पहले भी अकादमी की ओर से कई शायरों की अनदेखी की गई है। अगर हम आज हमारे नौवानों को भोपाल के शायरों से रूबरू नहीं करवाएंगे तो फिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।