सियासी दलों की परेशानी बढा रहा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत

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भोपाल। भीषण गर्मी के बीच अब मध्य प्रदेश की बची हुई 23 सीटों पर चुनावी प्रचार भी गर्म है| लेकिन इस बार बिना किसी लहर के हो रहे चुनाव में चुनाव आयोग से लेकर सियासी दलों तक को वोटिंग का टेंशन है| मप्र में दूसरे चरण के चुनाव की तारीख़ नज़दीक आने को हैं ऐसे में रैली और नुक्कड़ सभाओं से निकलकर नेता घर-घर दस्तक देने लगे हैं| उछलते पारे के बीच वोटिंग बढ़ाने की चिंता में डूबे चुनाव आयोग ने मतदाताओं की चिंता करना शुरू कर दिया है|  सिर्फ आयोग ही नही बीते चुनाव के मुकाबले इस बार वोटिंग प्रतिशत को लेकर सियासी दल भी टेंशन में हैं| देश में पहले और दूसरे चरण के मतदान के प्रतिशत ने भी सियासी दलों के गुणा-भाग को बिगाड़ दिया है.

मप्र में बीते कुछ चुनाव के मतदाऩ प्रतिशत पर नजर डालें तो….

1991 – 44.35

1996 – 54.06

1998 – 61.72

1999 – 54.85

2004 – 48.09

2009 – 51.16

2014 – 61.60

मतदान के कम प्रतिशत के बाद भी बीते चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा सत्ताईस सीटों पर जीत हासिल हुई थी| इस बार भी बीजेपी को उम्मीद है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़े या घटे लेकिन वो बीजेपी के पक्ष में जाएगा | हालांकि कांग्रेस मानती है कि ज़्यादा वोटिंग हुई तो वो हमारे पक्ष में पड़ेंगे|

एमपी में बीते 28 साल के लोकसभा चुनाव का मतदान प्रतिशत बताता है कि यहां सिर्फ 1998 में और इसके बाद 2014 में मोदी लहर में मतदान का प्रतिशत 61 फीसदी से ज़्यादा रहा है| बाकी चुनाव में मतदान 55 फीसदी से भी कम रहा| दलों की चिंता रमज़ान महीने को लेकर भी है| रोज़े होने के कारण कहीं मुस्लिम मतदाता मतदान करने से परहेज़ ना कर जाएं|

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