गेहूं-धान के बोनस पर पेंच, केंद्र के रुख से पशोपेश की स्थिति में सरकार

भोपाल। गेहूं-धान पर बोनस देने में राज्य सरकार पशोपेश की स्तिथि में है|  केंद्र के सख्त रुख के चलते सरकार फिलहाल धान उत्पादक किसानों को जय किसान समृद्धि योजना के तहत प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा नहीं करेगी। धान खरीदी होने के बाद ही इस मामले में कोई कदम उठाया जा सकता है| 

दरअसल, इससे पहले केंद्र सरकार ने गेहूं पर प्रति क्विंटल 160 रुपए प्रोत्साहन राशि देने की योजना लागू करने पर सेंट्रल पूल में 7 लाख मीट्रिक टन गेहूं लेने से इनकार कर दिया है। इसलिए केंद्र के रुख की वजह से प्रदेश सरकार धान खरीदी से पहले किसी तरह की घोषणा करना नहीं चाहती है। प्रदेश सरकार पर पहले से ही वित्तीय स्तिथि से जूझ रही है, वहीं अभी 7 लाख मीट्रिक टन गेहूं के बोनस का पैसा अटका हुआ है।  यदि केंद्र इसे सेंट्रल पूल में लेने के लिए राजी नहीं होता है तो सरकार के ऊपर पांच सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का आर्थिक भार आ जाएगा। 

 मदद को तैयार नहीं केंद्र

प्रदेश में वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। यही वजह है कि सरकार किसी तरह का वित्तीय भार उठाने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ दो-तीन बार स्वयं इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बात कर चुके हैं। हालांकि, अभी तक केंद्र के रुख में सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। उधर धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन का काम चल रहा है।  पडोसी राज्य छत्तीसगढ़ में इस तरह के हालत बन गए हैं| छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार और केंद्र सरकार के बीच धान खरीदी को लेकर सियासत चल रही है। छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों को धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए देने का वादा किया था, लेकिन केंद्र सरकार इसके लिए तैयार नहीं है।