डॉक्टरों ने दिखाया चमत्कार, मासूम बच्ची के गले से बिना सर्जरी के निकाला सिक्का, परिजनों ने जताया आभार

ड्यूटी पर तैनात डॉ. अरुणेन्द्र शुक्ला ने सूझबूझ दिखाते हुए पहले बच्ची के गले का एक्स-रे करवाया। इसके बाद अपने साथी डॉ. मनोज चौधरी की सहायता से सिक्के को निकालने का प्रयास शुरु किया और सिक्के को बहार निकाल दिया।

छतरपुर, संजय अवस्थी। डॉक्टरों को यूं ही भगवान का दर्जा नहीं दिया गया है। एक तरफ जहां डॉक्टर कोरोना (corona) काल में अपनी जान दांव पर रख रख मरीजों का इलाज कर रहे है। तो वहीं छतरपुर (Chhatarpur) में भी डॉक्टरों की एक टीम ने चमत्कार कर दिया। छतरपुर में गुरुवार को जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टरों ने एक ऐसा काम किया जिससे कई लोग चौंक गए। दरअसल डॉक्टरों ने सूझबूझ दिखाते हुए एक मासूम बच्ची के गले में फंसे सिक्के को बिना सर्जरी के बाहर निकाल दिया। जिससे सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए। डॉक्टरों के इस कार्य की पूरे शहर में सराहना की जा रही है। वहीं बच्ची के परिजनों ने भी चिकित्सकों का आभार जताया है।

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जानकारी के मुताबिक राजनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम भभुआ के रहने वाले ज्ञानचंद्र पटेल की 6 वर्षीय पुत्री दीपिका ने खेलते समय सिक्का निगल लिया था। जो उसके गले में फंस गया था। परिजन दोपहर करीब 2 बजे बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। ड्यूटी पर तैनात डॉ. अरुणेन्द्र शुक्ला ने सूझबूझ दिखाते हुए पहले बच्ची के गले का एक्स-रे करवाया। इसके बाद अपने साथी डॉ. मनोज चौधरी की सहायता से सिक्के को निकालने का प्रयास शुरु किया। डॉ. अरुणेन्द्र शुक्ला ने बताया कि इस तरह के मामलों में ज्यादातर सर्जरी ही की जाती है। लेकिन उनके दिमाग में एक नई तरकीब आई। इस तरकीब के अनुसार उन्होंने पेशाब की नली को मुंह के माध्यम बच्ची के गले तक डाला और उसका गुब्बारा फुलाकर सिक्के को उसमें दबा लिया और फिर नली को बाहर निकाल लिया गया। जिसके साथ सिक्का भी बाहर आ गया।  बिना सर्जरी के सिक्का बाहर निकलने की खबर जैसे ही शहर में फैली वैसे ही यह चर्चा का विषय बन गया। शहर में उक्त दोनों डॉक्टरों की जमकर सराहना हुई। वहीं बच्ची के परिजनों ने भी चिकित्सकों का आभार जताया है।

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