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केन बेतवा लिंक परियोजना : मुआवजा नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने किया विरोध, बांध का काम बंद कराया

Written by:Atul Saxena
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नाराज ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में लगी मशीनों मजदूरों एव कर्मचारियों को पन्ना टाइगर रिजर्व पंन्ना भुसोर बेरियर के बाहर खदेड़ दिया , ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि बिना मुआवजा दिए निर्माण कार्य चालू किया तो उग्र आंदोलन होगा।
केन बेतवा लिंक परियोजना : मुआवजा नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने किया विरोध, बांध का काम बंद कराया

केन बेतवा लिंक परियोजना : बुन्देखंड सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्र के लिए वरदान साबित होने वाली केव बेतवा लिंक परियोजना फिलहाल उसी क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है, पीड़ित और परेशान ग्रामीणों ने आज इसके खिलाफ आक्रोश जताया और बांध का काम रोककर प्रदर्शन किया।

छतरपुर जिले में केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत बांध का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन आज अचानक बहुत से ग्रामीण विरोध जताते हुए साइट पर पहुंच गए और काम कर रही कंपनी के कर्मचारियों का काम बंद करवा दिया , ग्रामीणों ने कहा कि हमारे साथ जबतक न्याय नहीं होता हम काम नहीं होने देंगे।

ढ़ोडन, पलकोहा ,खरयानी मैनारी ,सुकवहा सहित आधा दर्जन गाँव के विस्तापित लोगो ने आज ढ़ोडन बांध का निर्माण काम रोककर विरोध किया और काम में लगे मजदूरों को धमका कर भगा दिया , ग्रामीणों ने कहा कि हमारी जमीनों का अधिग्रहण कर लिया और हमें मुआवजा भी नहीं दिया।

आर पार की लड़ाई की चेतावनी 

ग्रामीणों ने कहा कि हमें मुआवजा चाहिए और अब पैकेज भी चाहिए, उन्होंने कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता हम बांध का काम शुरू नहीं होने देंगे, उन्होंने कहा कि यदि हमारे साथ धोखा किया तो हम सहन नहीं करेंगे अब  आर पार की लड़ाई लड़ेंगे।

मशीनों, मजदूरों एवं कर्मचारियों को खदेड़ा 

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि पहले मुआवजा राशि दी जाये इसके बाद निर्माण कार्य चालू करे नाराज ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में लगी मशीनों मजदूरों एव कर्मचारियों को पन्ना टाइगर रिजर्व पंन्ना भुसोर बेरियर के बाहर खदेड़ दिया , ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि बिना मुआवजा दिए निर्माण कार्य चालू किया तो उग्र आंदोलन होगा।

छतरपुर से सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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