पेंच क्षेत्र की 3 कोयला खदानों में लंबे समय से लगी आग, सीएमडी को नहीं सुध, विधायक ने लगाए गंभीर आरोप

क्षेत्रीय विधायक ने स्थल का दौरा कर जब कंपनी के आला अधिकारियों से बात की तो विधायक के होश उड़ गए कि इतनी बड़ी घटना की जानकारी उन्हें भी नहीं है।

परासिया, विनय जोशी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Western Coalfields Limited) के पेंच क्षेत्र की तीन कोयला खदानों के भंडारण में आग लगी हुई है। खास बात तो यह कि लगी आग को भुजाने के लिए प्रबंधन ऊंट के मुँह में जीरे जैसा काम कर रही है। यह देखकर किसी बड़े घोटाले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। क्षेत्रीय विधायक ने स्थल का दौरा कर जब कंपनी के आला अधिकारियों से बात की तो विधायक के होश उड़ गए कि इतनी बड़ी घटना की जानकारी उन्हें भी नहीं है।

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वेकोलि के नागपुर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की कोयला संबंधी गड़बड़ी को लेकर बड़ा गंभीर मामला सामने आया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार प्रतिदिन सभी क्षेत्र के महाप्रबंधक से कोयला उत्पादन- प्रेषण एवं भंडारण की जानकारी लेते हैं और महाप्रबंधको को हर दिन का उत्पादन लक्ष्य देते हैं। लेकिन सबसे हैरतभरी जानकारी यह सामने आई है कि पेंच क्षेत्र की 3 खदानों के कोल भंडारण में लंबे समय से आग लगी हुई है। लगातार कोयला जल रहा है। लेकिन सीएमडी को इसकी कोई जानकारी नहीं है।

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आग लगने के पीछे अधिकारियों का हाँथ- सोहन वाल्मीक
दरअसल इस बात का खुलासा परासिया के विधायक एवं इंटक के अध्यक्ष सोहन वाल्मीक ने किया है। उन्होंने जानकारी दी कि बड़कुही एवं उरधन ओपन कास्ट तथा माथनी भूमिगत खदान के कोल भंडारण में आग लगी हुई है और लंबे समय से कोयला जल रहा है। तो बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि पेंच क्षेत्र के महाप्रबंधक से रोज कोयले उत्पादन संबंधी चर्चा के दौरान क्या कोयले में आग लगने की कोई जानकारी सीएमडी को नहीं मिली। ऐसा कतई संभव नजर नहीं आता है। माना जा रहा है कि कोयले में आग लगने की घटना के पीछे नागपुर मुख्यालय के बड़े अधिकारियों का ही बड़ा खेल नजर आता है। जिससे कि यह बताया जा सके कि कोयला जितना जला नहीं है उससे कई गुना ज्यादा कोयला जलना दस्तावेजों में बताया जा सके। इसलिए कि सीएमडी इस बात को जानते हैं। अगर कोयले का ज्यादा स्टॉक हुआ तो उसमें स्वतः जलन से आग लगना ही है। शायद इसी योजना के कारण जानबूझकर कोयले का भंडारा किया जाता है। जबकि उसके उठाव की प्रक्रिया काफी बाद में की जाती है।

सूत्रों का कहना है कि आग लगने के बाद उसे बुझाने बुझाने के कोई ठोस प्रयास नहीं होते हैं। स्वयं इंटक अध्यक्ष सोहन बाल्मिक ने बताया की आग को बुझाने के लिए मात्र एक इंच पाइप लाइन से पानी का छिड़काव किया जा रहा था। ऐसा लगता है कि कोयला संबंधी गड़बड़ी को लेकर नागपुर मुख्यालय के अधिकारियों का बड़ा खेल है। कोल भंडारण में आग लगने को लेकर एक बड़ी साजिश है जो बड़ी जांच का विषय है।

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