छिंदवाड़ा, डेस्क रिपोर्ट। विशेष सत्र न्यायालय ने नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस की कार्यवाही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामले में पीड़िता की गवाही और डीएनए रिपोर्ट(DNA Report) उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म होने की कहानी बता रहीं है। लेकिन, पुलिस ने केवल एक आरोपी के खिलाफ मामले की चार्जशीट बनाकर न्यायालय में प्रस्तुत की।

दो साल पहले किया था अगवा, फिर तीन दिन तक किया सामूहिक दुष्कर्म
बात दो साल पहले की है, जब शहर के लालबाग से अगवा की गई एक नाबालिग बच्ची को तीन लोगों ने अपने साथ परासिया के जंगल में ले गए, और फिर तीन दिनों तक लगातार सामूहिक दुष्कर्म करते रहे। उसके बाद मुख्य आरोपी हरिसिंग उर्फ हिर्री पिता साबूलाल खरे उम्र 29 वर्ष निवासी बड़कुही ने पीड़िता को अपने घर ले गया था। वहां से पीड़िता एक अन्य महिला की मदद से पुलिस स्टेशन पहुंची। इस मामले में चांदामेटा पुलिस ने केवल हरिसिंग के खिलाफ प्रकरण बनाकर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इस मामले में न्यायालय ने पुलिस की जांच और जांच अधिकारी की इस हरकत को लापरवाही बताकर पुलिस के आला अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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मेडिकल टेस्ट में हुआ गैंग रेप का खुलासा, नाबालिग कहती रही लेकिन किसी ने नहीं सुना-
पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई थी और सेंपल का डीएनए टेस्ट भी कराया गया। डीएनए जांच रिपोर्ट में पीड़िता की बॉडी में तीन लोगों के सीमन पाए जाने की पुष्टि हुई । यही बयान न्यायालय में पीड़िता ने दिया। लेकिन, जांच अधिकारी गोपाल घासले ने पूरक कथन लेकर अन्य दो आरोपियों को बचाने का प्रयास किया है।

नवमी में पढ़ रही थी पीड़िता-
देश की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला अत्यंत गंभीर है। जिस बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ, वह शहर के एक स्कूल में नवमी की छात्रा थी और शहर के ही एक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।12 जनवरी 2019 को बच्ची जब अपने गांव से आई और बस स्टैंड से उतरकर पैदल हॉस्टल जा रही थी, तभी उसे लालबाग के पास से वैन में अगवा कर लिया गया।

सुनाई आजीवन कारावास की सजा-
विशेष सत्र न्यायाधीश संध्या मनोज श्रीवास्तव ने मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी हरिसिंह को पाक्सो एक्ट सहित नाबालिग से गैंग रेप का दोषी पाया है। बता दें कि न्यायालय ने आरोपी को तीन अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आईपीसी की दुष्कर्म, अपहरण व धमकी सहित 7 धाराओं में सजा और कुल 54 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने अपने फैसले में लिखा-
जिस प्रकार अवयस्क बच्चों के संबंध में इस प्रकार के अपराधों में वृद्धि हो रही है तो इस न्यायालय को यह धारणा बनाने में संकोच नहीं है कि इस प्रकार के लचर अन्वेषण से अपराधी खुलेआम समाज में घूमते रहेंगे। आए दिन कभी भी किसी भी समय किसी भी बच्ची या अबोध बच्चियों से बलात्कार करते रहेंगे। ऐसा अनुसंधान अनुसंधान अधिकारी की कर्तव्य निष्ठा व ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।