कोयला खदान मजदूरों के लिए यूनियनों का आंदोलन, प्रबंधन ने दिया आश्वासन

छिंदवाड़ा, विनय जोशी। कोयला खदान में मजदूरों के हितों में काम करने वाली यूनियनों ने शनिवार को अपने अपने अंदाज में आंदोलन किया। इंटक यूनियन ने खदान में जाकर भूख हड़ताल की तो बीएमएस, एटक, सीटू, एचएमएच ने मिलकर विजय साइडिंग में कोल परिवहन को रोक कर मजदूरो के हितों के लिए प्रबंधन से लड़ाई लड़ी।

वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के पेंच क्षेत्र में स्थित नहेरिया भूमिगत कोल माइन्स में विगत दिनों जोरदार बारिश होने से खदान में पानी भर गया। इस कारण कोल उत्पादन बंद हो गया। लगातार पानी भरने से पेंच क्षेत्र की जीवनदायिनी खदान के बंद होने का खतरा मंडराने लगा और खदान में कार्यरत कामगारों के ऊपर ट्रांसफर का डर सताने लगा। प्रति दिन 1000 टन कोयला का उत्पादन करने वाली खदान वर्तमान में 150 टन का उत्पादन कर रही थी, जिसके कारण प्रबंधन को घाटा हो रहा था। कोल प्रबंधन की लापरवाही के चलते खदान से पानी निकालने के लिए उचित व्यवस्था नहीं करने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई। प्रबंधन इसी बहाने कामगारों को दूसरे स्थान पर ट्रांसफर कर मुक्ति पाना चाह रहा था। लेकिन क्षेत्र के विकास और मजदूरो के हितों के लिए श्रमिक यूनियनों ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन किया।

इंटक यूनियन अध्यक्ष ने खदान में जाकर अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक दिवसीय भूख हड़ताल की और धरने में बैठ गए। अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कोल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया और कहा कि यह उनकी सोची समझी रणनीति के तहत ऐसा किया गया है। उन्होने कहा कि जब तक प्रबंधन हमारी मांग नही मानेगा हम अपना आंदोलन चालू रखेगे।
वहीं मजदूर हितों की रक्षा के लिए कोयला खदान में कार्यरत बीएमएस, एटक, सीटूऔर एचएमएच ने भी विजय साइडिंग में कोल परिवहन को रोक कर अपना विरोध किया। उन्होंने साइडिंग के समीप कार्यकर्ताओं के साथ सभा की और पूर्ण रूप से परिवहन बंद करा दिया।

कोयला खदान की पांचों यूनियन द्वारा किये गए इस आंदोलन से कोल प्रबंधन को उनके सामने झुकना पड़ा और आनन फानन में महा प्रबंधन कार्यलय में यूनियन के पदाधिकारियों से बात की गई। प्रबंधन ने उनकी बातों को सुन तत्काल प्रभाव से क्रियान्वित करने का आश्वासन दिया है।