इस कांग्रेस नेता ने कसा सीएम शिवराज पर तंज, कहा- उपचुनाव को देखते हुए कोरी बयानबाजी न करें मुख्यमंत्री

बालाघाट, सुनील कोरे

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ट्वीट कर बताया कि मध्यप्रदेश के संसाधनो पर पहला अधिकार मध्यप्रदेश के बच्चों का होगा। सभी शासकीय नौकरियां सिर्फ मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए ही आरक्षित होगी। हमारा लक्ष्य प्रदेश के प्रतिभाओं को प्रदेश के उत्थान में सम्मिलित करना है, जिसका कांग्रेस सेवादल ने स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जो बाते ट्वीट कर रहे है, उसका आदेश भी जारी करें।

शिवराज का ट्वीट है कोरी बयानबाजी

कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कि कोरी घोषणाओं की तरह यह ट्वीट भी कोरी बयानबाजी है और मुख्यमंत्री ने यह बात प्रदेश की 27 विधानसभा सीटो पर होने जा रहे उपचुनाव को देखते ही कही है, लेकिन इसका कोई असर प्रदेश के बच्चों और युवाओं पर होने वाला नहीं है।

सत्ता को बचाने के लिए कर रहे युवाओं को आकर्षित

आगे उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार यह मांग उठाती रही है कि प्रदेश की नौकरियो में पहला हक प्रदेश के युवाओं का है, लेकिन प्रदेश में 15 सालों तक राज करने वाली भाजपा ने कभी ध्यान नहीं दिया। आज जब प्रदेश की सत्ता को बचाना है तो मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश की 27 विधानसभा सीटो पर होने वाले उपचुनाव के पहले यह बात कर युवाओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे है. लेकिन अब प्रदेश का युवा गुमराह होने वाला नहीं हैं।

सरकार कैबिनेट बैठक कर करे आदेश जारी

कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान वास्तव में प्रदेश के बच्चों और युवाओं को मध्यप्रदेश के संसाधन और नौकरियों में हक देना चाहते है तो इसके लिए सरकार केबिनेट की बैठक लेकर आदेश जारी करें। तब माना जायेगा कि वाकई में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान प्रदेश के बच्चों और युवाओं को प्रदेश के संसाधन और नौकरी में उनका हक देना चाहते है।

प्रदेश का खाजाना भरने के लिए मांगे जा रहे थे प्रदेश से बाहर आवेदन

जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी ने कहा कि तीसरी बार मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2018 में बालाघाट जिले में पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को ज्ञापन देकर शिक्षक पात्रता परीक्षा में केवल प्रदेश के युवाओं को अवसर देने की मांग की थी, किन्तु उस समय मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कोई ध्यान नहीं दिया। प्रदेश का खजाना भरने की मंशा से शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रदेश के बाहर के युवाओं से भी आवेदन मंगाये गये और अब जब शिक्षक पात्रता परीक्षा के परिणाम आने के बाद अभ्यार्थियों का चयन भी किया गया तो उसमें प्रदेश के बाहर के अभ्यार्थी शामिल है। जिससे साफ होता है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का प्रदेश के संसाधन और नौकरी में बच्चो और युवाओं का अधिकार होने की बात, बेमानी है।

प्रदेश का एक बड़ा युवा वर्ग हुआ हत्सोत्साहित 

उन्होंने कहा कि वर्षो बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा के तहत शिक्षकों की भर्ती निकली थी, जिसमें प्रदेश के हजारों युवाओं ने आर्थिक बोझ उठाकर पूरी मेहनत से परीक्षा दी और आज जब वह चयनित हो गये तो उनके दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को बंद करवा दिया गया है। जिससे प्रदेश का एक बड़ा युवा वर्ग हत्सोत्साहित है और मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। पहले सरकार शिक्षक भर्ती के लिए दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को प्रारंभ कराये और उसमें प्रदेश के चयनित युवाओं को अवसर दे, तब माना जायेगा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, नौकरियो में प्रदेश के युवाओं को अवसर प्रदान कर रहे है।

सीएम  शिवराज के बयान का असर युवाओं पर नहीं होगा

अन्यथा यह उपचुनाव के पहले केवल और केवल प्रदेश में अपनी सत्ता को बचाये रखने के लिए उनके द्वारा दिया गया कोरा बयान है, लेकिन अब इसका असर प्रदेश के युवाओं पर नहीं होगा, क्योंकि प्रदेश का युवा, सालों से भाजपा सरकार में हो रही अपनी उपेक्षा और नौकरियों के नहीं निकलने से काफी परेशान है।

 सरकार ओबीसी को दिलाये 27 प्रतिशत आरक्षण

कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष सौरभ लोधी ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा प्रदेश के ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। जो मामला कोर्ट में जाने के बाद से लंबित है, कोर्ट में प्रदेश सरकार के पक्ष नहीं रखने के लिए लटकता जा रहा है। इस मामले में प्रदेश की सरकार, प्रदेश के ओबीसी वर्ग की भावनाओं को देखते हुए कोर्ट मंे अपना मजबूती से पक्ष रखें और ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाये।